जरगर समेत 3 आतंकी ढेर

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बुधवार को दक्षिण कश्मीर के हुसैनपोरा अरवनी में गत शुरू हुआ आतंकरोधी अभियान लश्कर के कमांडर माजिद जरगर उर्फ तल्हा, वसीम और राहिल के मारे जाने के साथ समाप्त हो गई। इससे पहले गुरुवार सुबह उस समय दोबारा गोलियों की आवाज गूंज उठी, जब एक मकान में छिपे दो आतंकियों को मार गिराने के लिए जवानों ने घेराबंदी का दायरा तंग करते हुए तलाशी अभियान दोबारा शुरू किया गया था|

हुसैनपोरा कुलगाम में मुठभेड को लेकर पैदा हुए कानून व्यवस्था के संकट को देखते हुए प्रशासन ने दक्षिण कश्मीर में मोबाईल सेवाएं बंद करने के बाद अब बडगाम से बनिहाल तक रेलसेवा को भी अगले आदेश तक बंद कर दिया। मुठभेड में तीन आतंकियों के मारे जाने की खबरों से फैले तनाव को देखते हुए प्रशासन ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम में मोबाइल सेवा को अगले आदेश तक बंद कर दिया है|

दुजाना के बारे में कहा जा रहा है कि वह बीती रात ही घेराबंदी तोड भाग गया था। लेकिन संबधित अधिकारियों ने इस बारे में कुछ भी कहने से इंकार करते हुए कहा कि अभी तलाशी अभियान जारी है। आतंकियों का ठिकाना बने मकान की तलाशी ली जा रही है। गांव में तीन से चार आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर तलाशी अभियान चलाया गया था। अभी तक तीन ही शव मिले हैं| अबु दुजाना वादी में गत चार वर्षों से सक्रिय है। वह अगस्त 2015 में श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर बीएसएफ काफिले पर हुए हमले की साजिश में भी शामिल था और अबु कासिम के मारे जाने के बाद लश्कर ने उसे दक्षिण कश्मीर की कमान सौंपी थी। जुलाई में आतंकी बुरहान के जनाजे में भी वह शामिल हुआ था और उसके बाद 31 जुलाई को भी वह करीमाबाद पुलवामा में आयोजित एक भारत विरोधी रैली में शामिल हुआ था|

अक्टूबर 2015 से सितंबर 2016 तक श्रीनगर से अनंतनाग तक जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षाबलों पर अधिकांश हमलों का वही मुख्य सूत्रधार रहा है। श्रीनगर के निकट स्थित इडीआई परिसर पर इस साल हुए दो आत्मघाती हमलों की योजना भी उसने ही तैयार की थी। श्रीनगर जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुजाना द्वारा रचे गए आतंकी हमलों में लगभग 20 सुरक्षाकर्मी एक साल में मारे गए हैं। गिलगित बाल्टिस्तान का रहने वाले दुजाना के जिंदा अथवा मुर्दा पकड़े जाने पर 10 लाख का ईनाम है|