योगी सरकार उप्र लोकसेवा आयोग भर्तियों की सीबीआई जांच करने की तैयारी में

213
SHARE

उप्र लोकसेवा आयोग में सपा शासनकाल के दौरान हुई भर्तियों की सीबीआइ जांच कराने की दिशा में प्रदेश सरकार बढ़ चली है। आयोग ने पिछले पांच साल में हुई सभी भर्तियों का पूरा ब्योरा गुरुवार को शासन को सौंपा है। आयोग अध्यक्ष डा. अनिरुद्ध यादव ने हर भर्ती का अहम रिकॉर्ड सरकार को सिपुर्द किया। इसमें छोटी-बड़ी करीब छह सौ से अधिक भर्तियों का ब्योरा दिया गया है। माना जा रहा है कि इनकी पड़ताल कराने के बाद सरकार जांच का एलान करेगी।

सपा शासनकाल में लोकसेवा आयोग की भर्तियों में गड़बडिय़ों की भरमार रही है। प्रतियोगियों ने हर भर्ती पर सवाल उठाए, लेकिन एक भी मामले की जांच नहीं हुई। यह जरूर है कि कोर्ट ने तमाम प्रकरणों को बदलने का आदेश दिया। यह तय है कि यदि पांच साल की भर्तियों की सीबीआइ से जांच हुई तो भ्रष्टाचार व अनियमितता कर मनमाने चयन के अनेक मामले उजागर होने के पूरे आसार हैं। आयोग में पीसीएस, पीसीएस-जे, लोअर सबआर्डिनेट, आरओ-एआरओ जैसी छोटी-बड़ी करीब 600 से अधिक भर्तियों में गड़बड़ी हुई हैं। प्रतियोगियों के अनुसार आयोग अध्यक्ष अनिल यादव ने दो अप्रैल 2013 को कार्यभार ग्रहण किया था, उसके बाद से लेकर अब तक जो भी भर्तियां हुई हैं उनमें खामियों की भरमार है।

यही नहीं मौजूदा अध्यक्ष डा.अनिरुद्ध यादव के कार्यकाल में हुई भर्तियों पर भी अंगुली उठी है। आरोप है कि भर्तियों में लिखित परीक्षा में कम अंक पाने वालों को इंटरव्यू में अधिक नंबर देकर सफल किया गया। खास तौर से एक खास जाति के अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में ज्यादा अंक दिए गए। लिखित में ज्यादा नंबर पाने वाले कई अभ्यर्थी इंटरव्यू में कम अंक मिलने के कारण सफल ही नहीं हो सके।

आयोग ने भर्तियों में गड़बड़ी करने के लिए मनमाने नियमों का सहारा लिया। मसलन त्रिस्तरीय आरक्षण और स्केलिंग, वन टाइम पासवर्ड आदि के नियम लागू हुए। इसीलिए प्रतियोगी लंबे समय से सीबीआइ जांच की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर कोर्ट में याचिका तक दाखिल हो चुकी है और प्रधानमंत्री तक भर्तियों की जांच कराने की बात कह चुके हैं। सूबे में भाजपा सरकार आने के कुछ दिन बाद ही सबसे पहले आयोग की भर्तियों पर रोक लगाई गई।

प्रतियोगी लंबे समय से आयोग की खामियों को लेकर हमलावर रहे हैं लेकिन, पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान रायबरेली की सुहासिनी बाजपेई के प्रकरण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान इस ओर खींचा और उसी के बाद से आयोग का हाल बेहाल है। असल में पीसीएस मुख्य परीक्षा 2015 की अभ्यर्थी सुहासिनी का प्रकरण सामने आने के बाद आयोग पर मेधावियों की कॉपियां बदलने के आरोप और तेज हो गए हैं।

सरकार ने आयोग अध्यक्ष डा. यादव से पांच साल में कितनी भर्तियां हुई, उसमें कितने अभ्यर्थियों का चयन हुआ, भर्ती का मानक क्या था, साक्षात्कार का बोर्ड कैसे गठित हुआ, लिखित परीक्षा व इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को अंक किस तरह मिले हैं, भर्ती की नियमावली सहित अन्य तमाम सवालों का जवाब सरकार को मिल गया है|

source-DJ