योगी सरकार साइकिल ट्रैक तोड़ने की तैयारी में, अखिलेश यादव ने किये थे 1km पर 1.50 करोड़ खर्चे

41
SHARE

सीएम अखिलेश यादव के साइकिल ट्रैक को योगी सरकार ने तोड़ने का निणर्य लिया है। जिसमें खासतौर पर कंजस्टेड एरिआ व नाली-नालों पर बनाए गए साइकिल ट्रैक्स को तोड़ा जाएगा। बता दें, लखनऊ में 105 किमी का साइकिल ट्रैक तैयार किया गया है, जिसको बनाने में कुल 118 करोड़ 72 लाख लाख रुपए खर्च किए गए। अब योगी सरकार ने इन्हें तोड़ने का प्लान बनाया है, जिसमें करोड़ों खर्च होने का अनुमान है।

पूर्व सीएम अखिलेश यादव के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के कई जिलों में साइकिल ट्रैक बनाए गए हैं। इसमें से लखनऊ में ही 105 किमी का साइकिल ट्रैक तैयार किया गया, जिसके लिए 118 करोड़ 72 लाख रुपए खर्च किए गए। इस तरह प्रति किलोमीटर साइकिल ट्रैक को बनाने में 1करोड़ 50 लाख तक खर्च किया गया है।

लखनऊ के इस 105 किमी के ट्रैक में 15 किमी का ट्रैक लखनऊ विकास प्राधि‍करण (एलडीए) ने और बाकी 90 किमी का ट्रैक पीडब्ल्यूडी ने तैयार कराया है। एलडीए के एई दिवाकर त्रिपाठी के मुताबिक, ”हमारे विभाग को साइकिल ट्रैक बनाने के लिए 17 किलो मीटर का एरिआ दिया गया था, जिसकी कुल लागत 27 करोड़ रुपए थी। हमने अपने काम को समय से पूरा करते हुए लगभग 15 किलो मीटर बना लिया। बाद में हमें साइकिल ट्रैक का अप्रूवल दिया गया, लेकिन बजट ही जारी नहीं किया गया।”

पीडब्ल्यूडी के सेंट्रल जोन चीफ कोमल प्रसाद के मुताबिक, ”पीडब्ल्यूडी को लखनऊ में कुल 90.66 किलोमीटर का साइकिल ट्रैक बनाना था। लखनऊ के 26 अलग-अलग स्थानों पर हमने साइकिल ट्रैक बनवाए, जिसकी लागत 91 करोड़ 72 लाख रुपए आई।”

पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता पद पर रहे अधिकारी ने बताया कि साइकिल ट्रैक बनाने का काम कई भागों में अलग-अलग विभागों को दिया गया था। जैसे- एलडीए, नगर निगम, सिंचाई विभाग आदि‍।

शुरूआती दौरा में पीडब्ल्यूडी को साइकिल ट्रैक को बनवाने के लिए नोडल एजेंसी के बनाया गया था। उस दौरान जो काम हुआ उसकी रिपोर्ट हमारे पास है। उसके बाद जिलों के प्राधिकरण, नगर निगम, सिंचाई विभाग आदि ने शासन से डायरेक्ट फाइल अप्रूव्ड करवाकर काम कराने लगे।

विभाग के आला अधिकारी फाइल लेकर जाते थे और उन्हें काम व बजट मिल जाता था। नोडल एजेंसी का लेटर हमें मिला था। इसके बाद सिर्फ हमें रिपोर्ट भेजी जाती थी। न हम किसी से कुछ पूछ सकते थे, न ही काम दे सकते थे। हर जिले में अलग-अलग विभागों, प्राधिकरणों ने काम किया। इसके लिए डायरेक्ट शासन से पैसा उनके पास जाता था। हमारा कोई हस्तक्षेप नहीं था।

योगी सरकार में नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा- ”हमने प्रदेश भर में बनवाए गए साइकिल ट्रैक को तोड़ने का निर्णय लिया है। क्योंकि कई बार ऐसा देखने में आया है कि साइकिल ट्रैक की वजह से जाम लगने तक की नौबत आ जाती है।”

”कई साइकिल ट्रैक को नालों-नालियों के ऊपर बनाया गया है। हमने इन्हें तोड़कर सड़कों को चैड़ा करने का निर्णय लिया है। इससे लोगों को जाम से निजात मिलेगी।”

पूर्व आईएएस एसपी आर्या ने कहा कि, ”जनता को तो टैक्स देने से मतलब है। वो भूखी रहेगी तो भी टैक्स देगी। पैदल चलेगी तो भी टैक्स देगी।’ यूपी की राजनीति में किसी सरकार के पास अब तक कोई ऐसी पॉलिसी नहीं दिखी जो कम से कम 40-50 साल के नजरिए से डेवलपमेंट पर फोकस करे। सपा सरकार थी उसने पैदल और साइकिल से चलने वालों के लिए करोड़ों रुपए खर्च करके ट्रैक बनाया। हो सकता है उनकी मंशा सही हो, लेकिन काम सही से नहीं करवा पाए।”

”उस वक्त ट्रैक में खर्च हुए करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाया गया। जिसमें से आधे से ज्यादा कमीशन बाजी में ठेकेदार ले गए। अखिलेश यादव को ये सोचना चाहिए कि विदेश से देखकर आए और यहां बना दिया, लेकिन उसकी उपयोगिता कितनी किन क्षेत्रों में है ये सोचने वाली बात है।’ अब योगी सरकार आई है तो उन्हीं के बिगड़े हुए कामों को सुधारने के लिए साइकिल ट्रैक तोड़ने का निणर्य लिया है। मुद्दा तो ये है कि इसमें भी जनता का ही पैसा बर्बाद होगा।”