हाईवे बनाए बिना बैंक से 455 Cr न‍िकालने पर योगी सरकार ने की CBI जांच की मांग

121
SHARE

योगी सरकार ने स्टेट हाईवे अथॉरिटी में घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने की तैयारी कर ली है। सरकार ने इसके लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली-सहारनपुर से यमुनोत्री तक एनएच-57 पर 206 किलोमीटर का हाईवे बनना था, लेकिन बिना हाईवे बनाए ही बैंक से 455 करोड़ रुपए निकाल लिए गए।

हाईवे बनाने का ठेका बसपा सरकार के दौरान अगस्त 2011 में मेसर्स एसईडब्ल्यू-एसएसवाई हाइवेज लिमिटेड को मिला था। लेकिन न तो सड़क ही बनी है और न ही किसी तरह का जमीन पर काम हुआ है। जालसाजों ने 206 किलोमीटर की फोरलेन सड़क कागजों पर बना डाली है।

ये कागजी फोरलेन सड़क दिल्ली-सहारनपुर-यमुनोत्री मार्ग एनएच-57 पर बननी थी। इसकी लागत 1700 करोड़ रुपए थी, लेकिन कार्यदायी कंपनी ने निर्माण कार्य दिखाकर 14 बैकों से 455 करोड़ 48 लाख रुपए निकाल लिए। कंपनी को फोरलेन बनाने का काम 3 साल में पूरा करना था। कंपनी ने परियोजना को पूरा करने के लिए 14 बैकों से करीब 600 करोड़ रुपए का लोन भी लिया था, लेकिन जांच हुई तो पता चला कि सिर्फ 13 फीसदी ही काम हुआ है।

इस काम में 150 करोड़ का ही कंपनी का खर्च पाया गया, जबकि कंपनी ने बैकों का 455 करोड़ रुपए सड़क निर्माण दिखाकर गबन कर लिया था। जिन 14 बैकों से 455 करोड़ रुपए गबन किया गया है, उनमें एसबीआई, आईसीआईसीआई, कॉरपोरेशन बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद जैसे बैंक शामिल हैं।

इस घोटाले में बैक अफसरों के भी शामिल होने के संकेत मिले हैं। कंपनी के 4 निदेशक, बैंक अफसरों समेत 18 लोगों के खिलाफ लखनऊ के विभूति खंड थाने में केस दर्ज किया गया है। वहीं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इस मामले में सख्त चेतावनी दी कि पहले की सरकारों में हुए घोटालों की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।