गोमती रिवर फ्रंट मामले में इंजीनियर निष्कासित, करवाई शुरू

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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राजधानी लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंटघोटाले में पहली कार्रवाई की है। बुधवार को योगी सरकार ने गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में इंजीनियर अनिल कुमार यादव को सस्पेंड कर दिया है। सूूत्रों की मानें तो इस घोटाले में अभी और कई अफसरों पर गाज गिर सकती है।

मालूम हो कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमती रिवर फ्रंट का औचक निरीक्षण किया था। योगी ने मौके पर ही दरबार लगाकर अफसरों को फाइल समेत बुलाया। यहां उन्होंने बारीकी से फाइलों का निरीक्षण किया और कमियां मिलने पर जमकर फटकार भी लगाई थी। योगी को निरीक्षण के दौरान कई कमियां भी मिली थीं। गोमती रिवर फ्रंट पर योगी आदित्यनाथ ने करीब 40 मिनट तक अधिकारियों से बात की। उन्होंने वहां नदी में गिर रहे नाले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि आखिर यह नाला गोमती नदी में क्यों गिर रहा है? उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि एक भी गंदा नाला गोमती नदी में ना गिरे। योगी आदित्यनाथ ने अफसरों से पूछा था कि गोमती रिवर फ्रंट का काम अधूरा क्यों है? इसका जवाब अफसर नहीं दे सके थे। इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट पर हुए खर्च का पूरा ब्योरा अफसरों से मांगा था। साथ ही इस प्रोजेक्ट के जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद इंजीनियर अनिल कुमार यादव के निलंबन की यह पहली कार्रवाई है। सूत्र बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट से जुड़े कई अन्य अफसरों पर भी जल्द ही गाज गिर सकती है।
योगी ने किए थे कई सवाल
योगी ने रिवर फ्रंट की बैठक मे अधिकारियों और प्रोजेक्ट से जुड़े लोगो की जमकर क्लास लगाई थी। योगी आदित्यनाथ ने पूछा था कि गोमती का पानी क्यों गंदा है? क्या सारे पैसे पत्थरों मे ही लगा दिए थे? प्रोजेक्ट की लागत इतनी ज्यादा क्यों हुई? उन्होंने अफसरों से कहा था कि मई तक गोमती का पानी साफ हो जाना चाहिए। योगी ने साथ में यह भी कहा था कि एक साल के भीतर प्रोजेक्ट पूरा करें, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी।