RTI में खुलासा, 21 लोगों को CM ऑफिस में आवेदन भेजने के बाद यश भारती मिला

128
SHARE

यूपी में अखिलेश सरकार के कार्यकाल के दौरान बांटे गए यश भारती अवॉर्ड को लेकर एक RTI नई जानकारी मिली है।

एक अनुमान के मुताबिक, अखिलेश सरकार ने करीब 200 लोगों को ये अवॉर्ड दिया था। इसमें कम से कम 21 लोगों को सीधे सीएम ऑफिस में आवेदन भेजने के बाद अवॉर्ड मिला था। इनमें से जिन लोगों की डिटेल अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को मिली है, उसे देखकर लगता है कि यश भारती बांटने में काफी भाई-भतीजावाद हुआ है। दरअसल, अवॉर्ड देने के लिए कोई तय आवेदन प्रॉसेस या मानदंड नहीं था। कई लोगों ने तो सीधे सीएम ऑफिस को अपने आवेदन भेजे थे, जबकि ये अवॉर्ड आधिकारिक तौर पर राज्य का कल्चरर ड‍िपार्टमेंट देता था।

आरटीआई के खुलासे के बाद अखिलेश यादव ने आजमगढ़ में अपने फैसले को जायज ठहराते हुए कहा, ”अब केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकारें हैं। आप भी अपने लोगों को अवॉर्ड दे सकते हैं।” इतना ही नहीं, अखिलेश ने पेंशन की राशि 50 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए तक करने की भी मांग की।

आरटीआई के जरिए अखिलेश यादव सरकार में यश भारती जीतने वालों की जो लिस्ट सामने आई है, उसमें सैफई महोत्सव के सूत्रधार टीवी एंकर, अपने ही नाम की रिकमेंडेशन करने वाले सीएम ऑफिस के एक अफसर, मेघालय में किए गए दो महीने लंबे ‘फील्डवर्क’ जैसी उपलब्ध‍ि बताने वाले एक रिसर्चर जैसे नाम शामिल हैं। लिस्ट में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव के चाचा और एक लोकल एडिटर की ओर से सुझाए गए नाम भी हैं।

इंडियन एक्सप्रेस को आरटीआई के तहत अखिलेश यादव के कार्यकाल में यश भारती पाने वाले 142 लोगों की डिटेल मिली है। इसके मुताबिक, कम से कम 21 लोगों को सीधे सीएम ऑफिस में आवेदन भेजने के बाद यश भारती अवॉर्ड मिला था।

खबर के मुताबिक, कम से कम 6 अवॉर्ड विनर ऐसे हैं, जिनका नाम समाजवादी पार्टी नेताओं ने बढ़ाया था। दो नाम तो अखिलेश यादव के चाचा और उनकी सरकार में मंत्री रहे शिवपाल यादव ने रिकमेंड किए थे।

एक नाम सपा नेता आजम खान और अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रहे राजा भैया ने भी दो नाम रिकमेंड किए थे। इसके अलावा एक लोकल एडिटर द्वारा सीएम ऑफिस को ईमेल के जरिए एक कैंडिडेट का नाम रिकमेंड किया गया।

योगी सरकार यश भारती अवॉर्ड्स का रिव्यू कर रही है। इसमें साल 2015 में बनाए गए आजीवन 50 हजार रुपए मंथली पेंशन देने के प्रावधान को खासतौर पर रिव्यू किया जा रहा है।

यूपी के एक आईएएस की बेटी को सिर्फ 19 साल की उम्र में यश भारती अवॉर्ड दिया गया था। यूपी की कल्चर मिनिस्ट्री की ज्वाइंट डायरेक्टर अनुराधा गोयल ने बताया, ”फाइनेंशियल ईयर 2017-18 में यश भारती के तहत आजीवन पेंशन के मद में कुल 4.66 करोड़ रुपए आवंटित हैं, लेकिन अभी तक एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया है। कल्चर मिनिस्ट्री डायरेक्टर ने अवॉर्ड्स के रिव्यू का आदेश दिया है।”

यश भारती को बंद करने पर यूपी के कल्चर मिनिस्टर लक्ष्मी नारायण चौधरी कहते हैं, ”यश भारती अवॉर्ड और पेंशन के बारे में सरकार विचार कर रही है, लेकिन फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।’

इस मामले पर पूछे गए सवालों पर समाजवादी पार्टी के स्पोक्सपर्सन राजेंद्र चौधरी ने कहा, ”बीजेपी हमारी सरकार के किए गए हर अच्छे काम को बंद करना चाहती है। यश भारती अलग-अलग फील्ड के लोगों को दिया जाता था। सभी नाम उच्च-स्तरीय कमेटी द्वारा तय प्रक्रिया के तहत चुने गए थे।”