मुस्लिम कार सेवक मंच के कार्यकर्ता राम मंदिर के निर्माण के लिए मजार पर चढ़ाएंगे चादर

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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए साधू संतों के आंदोलन तेज करने की खबरों के बीच सोमवार को मुस्लिम समाज के करीब 15 लोग बाराबंकी के देवा शरीफ दरगाह में चादर चढ़ाकर मन्नत मांगेगे. देवा में हाजी वारिस अली शाह की दरगाह राजधानी लखनउ से करीब 45 किलोमीटर दूर है. श्री राम मंदिर निर्माण मुस्लिम कारसेवक मंच के अध्यक्ष मो आजम खान ने बताया कि आज राम मंदिर निर्माण मुस्लिम कारसेवक मंच के करीब 15 कार्यकर्ता अयोध्या जाएंगे और वहां दरगाह पर चादर चढ़ाकर दुआ मांगेंगे कि अयोध्या में राम लला का भव्य मंदिर बनें.

आजम ने कहा कि अगर अयोध्या में राम जन्म भूमि पर जहां उनका जन्म हुआ था भव्य राम मंदिर का निर्माण हो गया तो हम दरगाह पर 1000 गरीब लोगों को भोजन कराएंगे तथा दरगाह पर सोने चांदी की चादर भी चढ़ाएंगे. देवा में हाजी वारिस अली शाह की दरगाह काफी मशहूर है और यहां हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्मो के लोग अपनी मन्नते मांगने आते हैं . यहां विदेश से भी श्रध्दालु आते है .

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का आंदोलन अगले सप्ताह पड़ने वाली गुर पूणर्मिा के बाद तेजी पकड़ सकता है. संत मंदिर आंदोलन को तेज करने के लिये सीतापुर स्थित नारदानन्द आश्रम में एकत्र होकर कार्ययोजना तैयार करेंगे.

नारदानन्द आश्रम के प्रमुख स्वामी विद्या चैतन्य महाराज ने बताया कि उत्तर प्रदेश तथा आसपास के राज्यों के विभिन्न अखाड़ों के संत आश्रम में एकत्र होंगे और अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के रास्तों के बारे में विचार-विमर्श करेंगे. उन्होंने बताया कि गुर पूणर्मिा आगामी नौ जुलाई को है. इसी दिन से हम राम मंदिर निर्माण के लिये ना सिर्फ संतों का बल्कि आम लोगों को भी सहयोग जुटाने के अभियान की शुरुआत करेंगे.

स्वामी चैतन्य ने गत 27 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुई अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा, “हमें विश्वास है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण वर्ष 2019 से काफी पहले शुरू हो जाएगा.” उन्होंने कहा कि नारदानन्द आश्रम में गुर पूणर्मिा की रस्में पूरी करने के बाद वह राम मंदिर निर्माण के समर्थन जुटाने के मकसद से एक विशेष रथ से प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश तथा उत्तराखंड के विभिन्न आश्रमों का दौरा करेंगे. स्वामी चैतन्य ने कहा कि करीब डेढ. महीने तक दौरा करने के बाद वह आश्रम लौटेंगे और मंदिर निर्माण का अंतिम खाका तैयार किया जाएगा.