यूपी के गांव 100 प्रतिशत साक्षर होंगे

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केंद्र और राज्य सरकार द्वारा साक्षरता के लिए कार्यक्रम तो बहुत चल रहे हैं, लेकिन समाज से अशिक्षा का कलंक मिटने का नाम नहीं ले रहा है। साक्षरता मिशन समाज के अंतिम व्यक्ति तक को शिक्षित करने के लिए अलग तरह की योजना लेकर आया है। इसमें व्यक्ति को ‘क, ख, ग सिखाने के साथ ही कानूनी जानकारी, डिजिटलीकरण, बैंक के फॉर्म भरने के साथ यातायात नियमों तक की जानकारी से लैस किया जाएगा।

जिससे पढऩे के साथ-साथ व्यक्ति कागजी कार्रवाई में भी पूरी तरह से निपुण हो सकेगा। इसकी शुरुआत राजधानी से की जा रही है। इसके बाद प्रदेश के हर एक गांव में इसे लागू किया जाएगा। पहले चरण में लखनऊ के सरोजनीनगर ब्लाक के दादूपुर और पिपरसंड गांव को 50 दिन में 100 प्रतिशत साक्षर करने का लक्ष्य रखा गया है।

राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में आंगनबाड़ी, प्रौढ़ शिक्षा, बाल एवं युवा कल्याण विभाग, समाज कल्याण की योजनाओं समेत हजारों स्वयंसेवी संस्थाएं शहरी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का प्रचार प्रसार कर रही हैैं। बावजूद इसके सिर्फ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ही 30 प्रतिशत लोग अशिक्षित हैैं। इस बाबत साक्षरता मिशन ने लोगों को सौ प्रतिशत शिक्षित करने के लिए एक नई योजना बनाई है। जिसमें गांव के युवाओं को सभी को शिक्षित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

एक गांव को साक्षर करने के लिए दो से तीन माह का समय रखा गया है। जिसमें 200 घंटे ग्रामीणों को पढ़ाया जाएगा। उन्हें प्रतिदिन दो से चार घंटे की क्लास दी जाएगी।सेवानिवृत्त आइएएस एवं डायरेक्टर साक्षरता मिशन एनकेएस चौहान के मुताबिक प्रदेश में 100 प्रतिशत लोगों को साक्षर बनाने के लिए यह योजना जल्द शुरू होगी। शासन को प्रोजेक्ट की फाइल भेज दी गई है। दूसरी ओर गांव में टीमें तैयार की जा रही हैं।

साक्षरता मिशन द्वारा गांव में ज्ञान की अलख जगाने के लिए गांव के युवाओं के साथ ही आंगनबाड़ी, नेहरू युवा केंद्र, बेसिक शिक्षा, कर्मचारियों और स्वयं सेवकों की मदद ली जाएगी। इसके लिए शासन स्तर पर बात चल रही है। इन स्वयं सेवकों को पहले 15 दिन की साक्षरता मिशन में ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद यह ग्रामीणों को शिक्षित करेंगे।

source-DJ