कानून-व्यवस्‍था पर बड़ा सवाल, 36 घंटे बाद भी नहीं मिली एसपी की सरकारी गाड़ी

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हरदोई के एसपी राजीव मल्होत्रा की सरकारी गाड़ी चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज होने के 36 घंटे बाद भी पुलिस व एटीएस दोनों खाली हाथ हैं। पुलिस को अब तक इस मामले में कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। पठानकोट मामले को देखते हुए आतंकी कनेक्शन से भी जोड़कर इस मामले की जांच हो रही है।

सबसे बड़ी बात यह है कि एक तो यह पुलिस की गाड़ी है, दूसरा इसमें वायरलेस सेट लगा हुआ है। इस सेट के जरिए पुलिस की गोपनीय सूचनाएं लीक होने का खतरा बना हुआ है।

जब पुलिस अपने अफसर की गाड़ी ढूंढने में इतना समय लगा रही है तो आम आदमी की क्या सुनवाई होती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल यह भी है कि चोरों के गिरोह के हौसले कितने बुलंद हैं कि वे राजधानी के एक पॉश इलाके से पुलिस कप्तान की सरकारी गाड़ी पर ही हाथ साफ कर देते हैं।

यह घटना सरकार के उस दावे को भी मुंह चिढ़ा रही है जिसके तहत लखनऊ में हाईटेक पुलिसिंग की बात कही जाती है। लखनऊ में जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरे में इस गाड़ी की लोकेशन नहीं पता चल सकी। पुलिस को जो लोकेशन मिली भी, वह टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरे से मिली है।