वरदा से तमिलनाडु में 10 मौतें, 10 दिन से हो रही थीं तैयारियां, इसलिए बचीं सैकड़ों जिंदगियां

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सोमवार दोपहर ढाई बजे चक्रवाती तूफान वरदा चेन्नई और उत्तरी तमिलनाडु के तटीय इलाके से टकराया। यह चेन्नई में 50 साल में सबसे तेज तूफान है। केंद्र और राज्य सरकार तूफान से बचाव के लिए पिछले 10 दिन से तैयारियों में जुटी थीं। इसके चलते सैकड़ों जिंदगियां बचाई जा सकीं। हालांकि तूफान काफी कमजोर पड़ चुका है। पर इससे एक करोड़ लोग प्रभावित हैं। फिलहाल तूफान से तमिलनाडु में 10 मौतें हुई हैं। मंगलवार को वरदा कर्नाटक पहुंचेगा और बुधवार को गोवा होते हुए खत्म हो जाएगा|
चेन्नई, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम, नेल्लोर, सुलुरपेटा, प्रकाशम, चित्तूर में एनडीआरएफ की 19 टीमें तैनात की गईं। हर टीम में 38 जवान थे। टीवी-रेडियो पर तूफान की जानकारी दी गई। घरों में जरूरी सामान जमा करने और मोबाइल हमेशा चार्ज रखने को कहा गया।सेना के 600 जवान, नेवी के 11 शिप्स, कोस्ट गार्ड के 4 बड़े व 6 पेट्रोलिंग जहाज, 4 डोरनियर, 2 चेतक एयरक्राफ्ट तैनात किए गए। किसी भी गड़बड़ी से निपटने के लिए 100 से ज्यादा गोताखोर व डॉक्टरों की टीम तैनात थी। खाना, टेंट, कपड़े, कंबल और दवाइयों की खेप भेजी। – रेस्क्यू और एयरड्रॉप के लिए नौसेना के विमान राजाली और देगा में तैनात रखे|
2 दिसंबर को तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश ने तूफान की चेतावनी जारी की। तटवर्ती इलाकों में खास एहतियात बरतने को कहा। पुलिस, प्रशासन, नगर निगम, फायर ब्रिगेड जैसी एजेंसियों को तैयार रखा। पिछले तूफानों में जिन्होंने काम किया उनकी सेवाएं लीं। समुद्र से सटे निचले इलाकों से लोगों को निकाला। 296 राहत शिविर खोले गए। इनमें 17 हजार 432 लोगों को पहुंचाया गया।तूफान से पहले संभावित क्षेत्रों में बिजली काट दी गई। सड़कों पर आवाजाही रोकी। मछुआरों को समुद्र में जाने नहीं दिया।वॉट्सएप और फेसबुक पर बताया कि कहां जाएं और कहां न जाएं। वॉलंटियर्स ने हेल्पलाइन बनाई। खराब मौसम में फंसें तो किससे संपर्क करें, इसकी जानकारी दी। – रजनीकांत जैसे बड़े स्टार ने भी ट्विटर पर लोगों को सचेत किया|