यूपी सरकार ने 17 जाति‍यों को SC के दर्जे का दि‍खाया लॉलीपॉप

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अखिलेश सरकार ने गुरुवार को प्रदेश की 17 जाति‍यों को एससी में शामिल करने वाले एक प्रपोजल को मंजूरी दे दी। यह प्रस्‍ताव केंद्र को भेजा जाएगा। इससे पहले ये सभी पिछड़ी जातियां (OBC) में शामि‍ल थीं। वहीं जानकारों ने इसे सरकार का चुनावी लॉलीपॉप बताया है|
 निषाद, मल्लाह, भर, बाथम, तुरहा, कहार, कश्यप, केवट, कुम्हार, राजभर,प्रजापति, धीवर, धीमर, बिंद, माझी, गौड़ और मछुवा शामि‍ल हुई हैं। इससे पहले 16 दि‍संबर को मुख्यमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में किए वादे के मुताबिक 17 पिछड़ी जातियों (OBC) को SC में शामिल करने संबंधी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है।उन्होंने कहा था कि एसपी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2005 में सीएम रहने के दौरान इन जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल करने संबंधी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। हालांकि‍ उनके बाद आई मायावती सरकार ने इसे वापस ले लिया था|
रिटायर्ड आईएएस हरीश कुमार का कहना है कि यह राज्य सरकार के क्षेत्र में नहीं है। यह तभी हो सकता है जब केंद्र सरकार चाहेगी।उन्होंने कहा कि जनगणना विभाग इस बात का सर्वे करता है कि देश और समाज में किन-किन जातियों का आर्थिक सामाजिक और शैक्षणिक स्तर क्या है।इसके बाद रजिस्ट्रार उसकी रिपोर्ट गवर्मेंट ऑफ इंडिया को सौंपी जाती है। वहां वि‍चार करने के बाद नि‍र्णय लि‍या जाता है।1947 में भी सभी नागरिकों के लिए समान अवसर प्रदान करते हुए सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछडे वर्गों या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की उन्नति के लिए संविधान में विशेष धाराएं रखी गई थीं|
उन्‍होंने कहा कि‍ ऐसा नहीं है कि ये पहली बार अखिलेश यादव ही कर रहे हैं। इसके पहले उनके पिता मुलायम सिंह यादव जब 2005 में मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने भी केंद्र सरकार से इन जातियों को एससी का दर्जा देने के लिए सिफारिश की थी।उस समय केंद्र सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया।केंद्र को सिफारिश भेजने के साथ ही मुलायम सरकार ने अपने स्तर पर भी अधिसूचना जारी कर इन जातियों को एससी-एसटी का दर्जा दिया था जिससे वे आरक्षण की सुविधाओं का लाभ ले सकें।मुलायम सरकार के हटने के बाद इस अधिसूचना को रद्द कर दिया गया था|