यूपी सरकार और नोएडा अथारिटी को, जमीन अधिग्रहण मामले में नोटिस

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नोएडा के योजनाबद्ध विकास के लिए 1992 में यहां की जमीन अधिग्रहित की गई थी। भूस्वामी किसान ने नये भूमिअधिग्रहण कानून को आधार बनाते हुए जमीन अधिग्रहण को चुनौती दी है।नोएडा में हाजीपुर गांव (सेक्टर 105) के जमीन अधिग्रहण का मामला सुप्रीमकोर्ट पहुंचा है।सुप्रीमकोर्ट ने याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा अथारिटी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है|

न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल व न्यायमूर्ति आर. भानुमती की पीठ ने किसान राजबीर त्यागी के वकील ब्रम्ह सिंह नागर की दलीलें सुनने के बाद ये नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद राजबीर और उसके दो भाइयों ने सुप्रीमकोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। हाईकोर्ट ने नये भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जमीन का अधिग्रहण समाप्त (लैप्स) हो जाने की दलील ठुकरा दी थी|

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता किसानों से कहा था कि वे रिफरेंस कोर्ट में जमा मुआवजे की रकम निकाल लें। सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील ब्रम्ह सिंह नागर ने नये भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की धारा 24 (2) का हवाला देते हुए कहा कि 1992 की भूमि अधिग्रहण कार्यवाई समाप्त (लैप्स) हो गई है। नया कानून 1 जनवरी 2014 को लागू हुआ है। ये कानून कहता है कि अगर अवार्ड 1 जनवरी 2014 कानून लागू होने की तारीख से पांच साल या पांच साल से ज्यादा पुराना है और भूस्वामी को मुआवजा नहीं दिया गया तो ऐसी स्थिति में अधिग्रहण कार्यवाही समाप्त मानी जाएगी।नागर का कहना था कि इस मामले में अवार्ड पांच साल से ज्यादा पुराना हो चुका है और भूस्वामियों को जमीन का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। इसके अलावा जमीन का कब्जा भी अभी तक भूस्वामियों के पास ही है। इस स्थिति में नये कानून के मुताबिक अधिग्रहण कार्यवाही रद या समाप्त मानी जाएगी। उनकी दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका में प्रतिपक्षी बनाई गई प्रदेश सरकार और नोएडा अथारिटी को नोटिस जारी किया|

नोएडा के नियोजित विकास के लिए 1992 में हाजीपुर गांव की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। 6 जनवरी 1992 को धारा 4 और 22 सितंबर 1992 को धारा 6 ही अधिसूचना निकली। जमीन का अवार्ड 13 जनवरी 2004 को हुआ था। उत्तर प्रदेश सरकार ने जमीन अधिग्रहित करके नियोजित औद्योगिक विकास के लिए नोएडा अथारिटी को दे दी। इस अधिग्रहण में राजबीर और उसके भाइयों की 15 बीघा जमीन भी शामिल थी। 2013 में भूमि अधिग्रहण का नया कानून आ गया। नया कानून लागू होने के बाद 2015 में इसे आधार बना कर तीनों भाइयों ने हाईकोर्ट में अधिग्रहण को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कर दीं थीं। जिसके बाद मामला सुप्रीमकोर्ट आया है|