विश्वविद्यालय राजभवन से मांगी गई रिपोर्ट पर जवाब देना जरूरी नहीं समझते: राज्यपाल

24
SHARE

राम नाईक ने राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के सम्मेलन में गुरुवार को राज्यपाल कुलाधिपति के रूप में विश्वविद्यालयों को कार्यप्रणाली सुधारने की नसीहत दी। उन्होंने इस बात पर पर क्षोभ जताया कि कई विश्वविद्यालय राजभवन से मांगी गई रिपोर्ट पर कई अनुस्मरण पत्र भेजने के बाद भी समय से जवाब देना जरूरी नहीं समझते हैं। जवाब देते भी हैं तो गोलमोल।

उन्होंने कहा कि जब कुलाधिपति कार्यालय के पत्रों को लेकर विश्वविद्यालय इस कदर लापरवाह हैं तो आम आदमी की परेशानी का सहज अंदाज लगाया जा सकता है। योजना भवन में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कुलाधिपति कार्यालय से संदर्भित प्रकरणों के निस्तारण के लिए विश्वविद्यालयों को नोडल आफसर नामित करने का निर्देश दिया।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को अपने कोर्स व वेबसाइट को अपडेट रखने के साथ कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कहा। विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में कुलसचिव, वित्त नियंत्रक, परीक्षा नियंत्रक, उप कुलसचिव व सहायक कुलसचिव के पद रिक्त होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस वजह से प्रशासनिक, विधिक, वित्तीय और परीक्षा से जुड़े कार्य बाधित हो रहे हैं। राज्य सरकार विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर यथाशीघ्र तैनाती करे। विश्वविद्यालयों से शैक्षिक कैलेंडर बनाने और हर महीने अपने कार्यकलापों की रिपोर्ट राजभवन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के पांच नए विश्वविद्यालयों में प्रथम परिनियमावली अभी तक अधिसूचित नहीं हुई है। शासन इन विश्वविद्यालयों की प्रथम परिनियमावली जारी कराए। उच्च शिक्षा विभाग ने सात राज्य विश्वविद्यालयों की परिनियमावली को अभी तक मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने नये पाठ्यक्रमों को शुरू करने से पहले उन्हें सक्षम स्तर से अनुमति प्राप्त कर परिनियमों में शामिल करने के बाद ही संचालित करने के लिए कहा ताकि भविष्य में किसी प्रकार की विधिक कठिनाई पैदा न हो।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को उन्हीं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को संचालित करने के लिए कहा जिनकी मांग हो।स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में नियुक्त शिक्षकों की सेवा शर्तों को उन्होंने विश्वविद्यालय सेवा अधिनियम व परिनियमों में समाहित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 में संशोधन के लिए एक समिति का गठित की गई है जो शीघ्र ही विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर संशोधित अधिनियम का प्रस्ताव राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगी। छात्रसंघ चुनाव कराये जाने के बारे में भी उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपेक्षित कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए कहा।

परमवीर चक्र से सम्मानित सैन्य वीरों के छायाचित्र विश्वविद्यालय परिसर में लगाने का भी निर्देश दिया। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि तीन साल के अथक प्रयासों से उच्च शिक्षा की बिगड़ी व्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। प्रसन्नता जतायी कि बीते तीन वर्षों में पहली बार उच्च शिक्षा विभाग ने मंत्रियों के साथ कुलपतियों की बैठक करायी। सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, पशुधन मंत्री एसपी सिंह बघेल, शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह समेत राज्य व केंद्रीय विश्वविद्यालयों के 31 कुलपति मौजूद थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन के बाद कुलपतियों को शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय में जलपान के लिए आमंत्रित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कार्यसंस्कृति सुधारे बिना कोई देश आगे नहीं बढ़ता। विकास भी तभी होगा, जब युवा राष्ट्र के प्रति स्वाभिमान की भावना से ओतप्रोत हों। उन्होंने कुलपतियों का आह्वïन किया कि वे विश्वविद्यालयों को प्रेरक विचारों के केंद्र के तौर पर भी विकसित करें।