आज तय होगा साइकिल की सवारी कौन करेगा

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समाजवादी पार्टी में काफी दिनों से चल रहे झगड़े पर आज विराम लग सकता है।शुक्रवार को चुनाव आयोग सपा की साइकिल पर सुनवाई करेगा। इस बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव के बीच सुलह की कोशिशें भी अंदर खाने चल रही हैं|

ऐसे में अब चुनाव आयोग ही यह तय करेगा कि साइकिल अखिलेश चलाएंगे या फिर मुलायम गुट अपनी राजनीतिक पहचान की इस विरासत को हासिल करेगा। वैसे सपा के इन दोनों खेमों को विवाद में साइकिल चिह्न जब्त होने का अंदेशा भी है। इसीलिए मुलायम गुट लोकदल के चुनाव चिह्न खेत जोतता किसान पर चुनाव मैदान में उतरने के दूसरे विकल्प पर भी विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि लोकदल के अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह से इस बाबत बात पूरी हो चुकी है। तो अखिलेश गुट पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पार्टी रही सजपा के चुनाव चिह्न बरगद वृक्ष के साथ अखाड़े में उतर सकता है|

 

समाजवादी पार्टी के अंदरुनी झगड़े में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के जरिये मुलायम सिंह की जगह अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद दोनों खेमों में जहां एक ओर सुलह की कोशिशें हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर सिंबल को लेकर चुनाव आयोग में कानूनी लड़ाई। मुलायम सिंह ने खुद चुनाव आयोग से मिलकर बीते सप्ताह साइकिल पर अपना दावा ठोका था। तो अखिलेश की ओर से भी साइकिल निशान हासिल करने के लिए आयोग में आवेदन किया गया। चुनाव आयोग ने इस पर दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज देने को कहा था|

इसके बाद अखिलेश गुट की ओर से रामगोपाल यादव ने डेढ़ लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेजों के साथ मुलायम के दावे को नकारते हुए साइकिल पर अपना कानूनी हक बताया था। वहीं मुलायम खेमे की ओर से शिवपाल यादव और अमर सिंह ने आयोग जाकर सपा महासचिव के नाते रामगोपाल यादव की ओर से कार्यकारिणी की बैठक बुलाने को ही गलत ठहराया था|

आयोग दोनों खेमों के दावों और दस्तावेजों का अध्ययन कर रहा है और उम्मीद की जा रही है कि शुक्रवार को साइकिल पर वह फैसला दे सकता है। चूंकि दोनों खेमों के दावों में कानूनी पहलुओं की अड़चन संभव है, ऐसे में इस आशंका को नकारा नहीं जा रहा कि आयोग विवाद के अंतिम निपटारे तक साइकिल सिंबल को जब्त कर ले। ऐसे में अखिलेश और मुलायम दोनों गुटों को नए चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना होगा|