जितना जल्दी हम अपनी कार्यशैली बदलेंगे, चुनौती अवसर में बदल जाएगी, ये कॉम्पिटीशन का दौर है, चुनौतियां बड़ी हैं

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आज नरेंद्र मोदी सिविल सर्विसेस डे के प्रोग्राम शिरकत की, मोदी ने कहा मुझे अफसरों की जिम्मेदारियों का पता है। 15-20 साल पहले हमी हम थे। ऐसे में कमियां नजरअंदाज करने की आदत बन जाती है। आम लोगों को लगता है कि सामान्य मानवीय के जीवन में 15-20 साल में एक विकल्प पैदा होता है। इसके चलते सरकार में बैठे लोगों की जिम्मेवारी पहले से ज्यादा बढ़ गई है। कार्य बोझ नहीं बढ़ा है, चुनौतियां बढ़ी हैं। कोई भी व्यवस्था स्पर्धा में होनी ही चाहिए। अब लोग प्राइवेट अस्पताल से सरकारी अस्पताल की तुलना करते हैं।

मोदी ने कहा तुलनात्मक स्थिति में हमें भी लगता है कि हमें आगे बढ़ना चाहिए। अच्छा ये होगा कि जितना जल्दी हम अपनी कार्यशैली बदलेंगे, तो ये चुनौती अवसर में बदल जाएगी। बदलते समय में सरकार के बिना कमी महसूस हो, लेकिन सरकार के रहते कमी महसूस न हो, लेकिन ये व्यवस्था तब बनेगी जब हम चीजों को उस तरीके से देखना शुरू करेंगे। क्वांटम जम्प तो हुआ है, हम इसका स्वागत करते हैं। मेरे सामने रिपोर्ट आई तो मेरा दिमाग और चलने लगा। अब थोड़ा क्वालिटेटिव एनालिसिस होना चाहिए। हमें ये तो देखें कि कैसे किया है। मैं चाहता हूं कि एक साल में क्वालिटेटिव चेंज होना चाहिए, ये कॉम्पिटीशन का दौर है, चुनौतियां बड़ी हैं।

मोदी ने कहा आपने देखा होगा गृहणी की योग्यता पर कभी गौर नहीं किया जाता, लेकिन जब परिवार का मुखिया अचानक छिन जाता है तो दिखाई पड़ता है कि गृहणी घर संभालना शुरू कर देती है। सबसे मेधावी लोग आईएएस बनते हैं काम भी उसी हिसाब से होना चाहिए। हमें ये देखना चाहिए कि कहीं हमारा अनुभव ब्रेक तो नहीं बन रहा? हमें गर्व होना चाहिए कि हमनें जो खेत जोता था, आगे के लोगों की वजह से उसमें फल भी आया। हमें इसी भाव से काम करना चाहिए। कई अफसर आप देखेंगे कि उन्होंने किसी आइडिया को बड़ा बनाया। आज खोजे से भी पता नहीं चलेगा कि वह कौन अफसर था। लेकिन आज कहीं इसमें कमी तो नहीं आ रही है।