हर महीने आठ लाख रुपए देती थी ISI, भोपाल के 3 लोगों को नेटवर्क चलाने के लिए

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आर्मी से जुड़ी जानकारी लीक करने के मामले में एटीएस ने पांच और आरोपियों को भी शुक्रवार को अरेस्ट कर लिया। उज्जैन, ग्वालियर, सतना और इंदौर समेत कई शहरों में दबिश देकर तमाम लोगों से पूछताछ की गई। शुरुआती जांच में पता चला है कि देशभर में पैरेलल टेलीफोन एक्सचेंज चलाकर में 500 से ज्यादा कम्युनिकेटर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम कर रहे हैं। सीमा पार से हैंडलर इनकी निगरानी कर रहे हैं। ये हैंडलर ही हवाला के जरिए नेटवर्क से जुड़े तमाम लोगों को पैसा भेज रहे हैं। भोपाल से गिरफ्तार मनीष गांधी, धुव्र सक्सेना और मोहित अग्रवाल पैरेलल टेलीफोन एक्सचेंज से करीब सवा आठ लाख रुपए महीना कमाते थे, एक सिम बॉक्स में 8, 16 या 32 पोस्टपेड सिमकार्ड लगाए जाते थे|

जांच में सामने आया है कि एक सिमकार्ड रोजाना करीब 400 मिनट तक इस्तेमाल किया जाता था। इसके लिए औसतन आठ डॉलर यानी करीब 544 रुपए मिलते थे। एक कॉल सेंटर में 300 सिमकार्ड रोजाना इस्तेमाल किए जाते थे।भोपाल में ऐसे 5 सेंटर होने का पता चला है। यानी तीनों को हर महीने करीब आठ लाख 16 हजार रुपए अदा किए जाते थे।धुव्र सक्सेना के गिरफ्त में आने के बाद प्रदेश बीजेपी ने उससे पल्ला झाड़ लिया है।वह गोविंदपुरा विधानसभा सीट से सक्रिय कार्यकर्ता रहा है। महापौर चुनाव के दौरान भी वह बीजेपी की आईटी सेल का मेंबर था|
पार्टी के प्रोग्राम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पीछे मंच पर दिखाई देने और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के आसपास रहने वाले धुव्र को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि वह बीजेपी में नहीं है।ऐसा कोई होगा तो उसे बीजेपी से उठाकर फेंक देंगे। आतकंवादी, डाकू और चोरों की बीजेपी में कोई जगह नहीं। पाकिस्तानी एजेंसी के लिए खड़े किए गए जासूसी नेटवर्क में फंड का इंतजाम भारत से ही होता था। आईटी एक्सपर्ट साइबर फ्रॉड और लॉटरी का झांसा देकर आम लोगों के अकाउंट में सेंध लगाते और रुपयों का बंदोबस्त करते थे|
अलग-अलग अकाउंट में ये पैसे ट्रांसफर करवाकर इसे दिल्ली स्थित दो बैंकों के खातों में ट्रांसफर करवाया जाता था। फिर इसी पैसे का इस्तेमाल देश में आईएसआई के नेटवर्क को विस्तार देने में किया जाता था।सीमा पार से हवाला के जरिए भी रकम पहुंचती थी। शुरुआती जांच में ऐसे 44 अकाउंट का पता चला है, जिनमें जालसाजी करके रकम मंगाई गई है। इस रकम को यहां से पाकिस्तान में बैठे आकाओं के अकाउंट में ट्रांसफर करने के प्रमाण मिले हैं। दो महीने पहले सतविंदर व दादू से जम्मू पुलिस ने पूछताछ की थी, तभी आईबी ने एमपी पुलिस को बलराम के बारे जानकारी दे दी थी|
बलराम बार-बार पाकिस्तान बात कर रहा था। खुफिया एजेंसियों ने उसकी कॉल की भी लगातार निगरानी की थी।जब यह साबित हो गया कि बलराम ने 100 से ज्यादा फर्जी अकाउंट खुलवा रखे हैं और बदल-बदलकर नंबरों से पाकिस्तान बात कर रहा है तो उसकी घेराबंदी कर ली गई।ATS ने प्रदेश के 11 जासूसों को हिरासत में लिया है। इनमें ग्वालियर से 5, भोपाल से 3, जबलपुर से 2 और सतना से 1 व्यक्ति शामिल हैं। इनमें से छह को गुरुवार की देर शाम भोपाल कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया है|
एक आरोपी ग्वालियर से भाजपा पार्षद का रिश्तेदार है। आरोपियों से तीन हजार से ज्यादा सिम कार्ड, 50 मोबाइल फोन, 35 सिम बॉक्स जब्त हुए हैं।इसके अलावा, फर्जी नाम-पते पर खोले गए सैकड़ों बैंक खातों की भी जानकारी मिली है। प्रदेश में आईएसआई के नेटवर्क के खिलाफ की गई ये अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है।एटीएस आईजी संजीव शमी ने बताया कि पिछले साल नवंबर में जम्मू-कश्मीर के आरएसपुरा से सतविंदर सिंह और दादू नामक दो आतंकियों की गिरफ्तारी हुई थी|
इन्होंने कबूल किया था कि मध्य प्रदेश से इन्हें सेना से जुड़ी तमाम जानकारियां और मदद मिला करती थीं। इसके लिए इन्हें मोटी रकम दी जाती थी, जो सतना में रहने वाले बलराम के खाते में पाकिस्तानी हैंडलर्स ट्रांसफर करते थे। सतविंदर पाकिस्तानी हैंडलर्स के कहने पर सैन्य सूचनाएं जुटाता था। पुल और सेना के कैम्प की फोटो खुफिया तरीके से लेता था। इसके अलावा, केंद्रीय सुरक्षा बलों के मूवमेंट और वाहनों की जानकारी भी जुटाई जा रही थी। बलराम ने अलग-अलग बैंकों में खाते खोल रखे थे|