हमारे समाज के लिए आईना है गौरी सावंत

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अभी कुछ दिनों पहले की ही बात है एक ऐड आता है ये ऐड है vicks का, कुछ अलग सा है कुछ सोचने के लिए भी…

ऐड में एक लड़की गायत्री है जो अपनी माँ के बारे में बता रही है किस तरह उसकी माँ ने अपनी ज़िन्दगी में कभी हिम्मत नहीं हारी और उसको गोद लिया और आज उसकी माँ हॉस्टल में उसको छोड़ने जा रही है और गायत्री बोलती है वो अपने माँ के लिए डॉक्टर नहीं वकील बनेगी।


ये वीडियो एक सच्ची कहानी पर है और ये कहानी है गौरी सावंत की

हम जिस समाज में है उसके लिए सिर्फ ही दो ही तरह के मानव है एक औरत एक मर्द और वो बाकि?
वो शायद मजाक उड़ने के लिए………
हम कितनी आसानी से किसी भी किन्नर या हिजड़ा को देखकर हँसाते है और मजाक उड़ाते है और दूसरी तरफ ये लोग आये है हमारी खुशी में शामिल होने कभी शादी की कभी बच्चे होने की.

गौरी सावंत उस समाज के लिए एक आईना है जो किन्नर का सामान करना नहीं जानता, गौरी एक बेटी की माँ भी है जिसका नाम गायत्री है गायत्री को गौरी ने उसकी माँ के मरने के बाद गोद लिया था गायत्री की माँ एक सेक्स वर्कर थी.
गौरी कहते हैं, “मैं विशेष महसूस नहीं करती हूं, क्योंकि मैं गायत्री के कारण एक माँ बन गया हूं और वह मेरी ताकत का आधार है, मेरे पिता मुझे एक पुलिसकर्मी बनना चाहते थे, मैं गायत्री के लिए सब कुछ कर सकती हूँ”.

गौरी का जन्म पुणे में हुआ है और नाम गणेश सुरेश सावंत पहले वो एक लड़का थी. 9 साल की उम्र में माँ के मरने के बाद दादी ने देखभाल की, स्कूल में गौरी को अपने अंदर बदलाव लगने लगे, दादी की साड़ी पहनना भी अच्छा लगता मगर पापा को ये सब पसंद नहीं था पापा पुलिस में थे. सभी मज़ाक उड़ाते थे और गौरी को भी अब पता चल चूका था वो लड़का नहीं लड़की है. गौरी ने अब स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली थी एक दिन गौरी ने रोज़ के मज़ाक से परेशान होकर घर छोड़ दिया.

अब ना नौकरी ना घर और ना ही एक किन्नर को नौकरी देना चाहता है

फिर गौरी एक ग़ैर- सरकारी संगठन के संपर्क में आई और अपना सेक्स बदल कर अब गणेश सावंत से गौरी सावंत बन गयी. साल 2000 में गौरी सावंत ने किन्नर और ट्रांसजेंडर की मदद से एक संगठन बनाया ‘सखी चर चौघी’ ये संगठन मालाड मुंबई में है.
साल 2001 में गौरी को पता चलता है एक सेक्स वर्कर की मौत हो गयी है और उसकी एक बेटी भी है गौरी ने उस बच्ची को गोद ले लिया और दोनों माँ बेटी बहुत ख़ुशी से रहते है साथ घूमते है खाना खाते है. गौरी गायत्री को बहुत प्यार करती है.

गौरी कहती है घर में माँ नहीं, स्कूल में दोस्त नहीं, कोई करीबी नहीं जिससे मन की बात बोल कर पाती, पिताजी नफरत ही करते थे, आखिर लोग किन्नरों से इतनी नफरत क्यों करते है???