योगी सरकार की कैबिनेट के सात महत्वपूर्ण फैसले

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योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 लागू करने का फैसला किया है। प्रदेश में उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हुए उद्यमियों को आकर्षित किया गया है। इसमें मेगा परियोजनाओं को नए सिरे से परिभाषित करते हुए सरकार ने निवेश को रोजगार से जोड़ा है।

उप्र औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 मंजूर
उप्र खाद्य सुरक्षा नियमावली 2017 लागू
अधीनस्थ न्यायालयों में शौचालय निर्माण को मंजूरी
केंद्र पोषित योजनाओं में केंद्र और राज्य के अंशदान में बदलाव
नरौरा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए मिलेगी भूमि
उप्र लोक सेवा अधिकरण अधिनियम में संशोधन
हर बूंद से अधिक सिंचाई योजना में अनुदान की राशि बढ़ी

आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में संपन्न हुई बैठक में सात महत्वपूर्ण प्रस्तावों को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने पत्रकारों को फैसलों की जानकारी दी। कैबिनेट ने नई औद्योगिक नीति के अलावा उप्र खाद्य सुरक्षा नियमावली 2017 लागू करने और अधीनस्थ न्यायालयों में पांच सीटेड शौचालय और दिव्यांगजन के लिए अलग शौचालय बनाए जाने का फैसला किया है। केंद्र पोषित योजनाओं में केंद्र और राज्य के अंशदान में 80 और 20 प्रतिशत के अनुपात को बदलकर अब 60 और 40 प्रतिशत किया गया है। बुलंदशहर के नरौरा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए सिंचाई विभाग से जमीन दिए जाने को मंजूरी दी गई है। कैबिनेट ने उप्र लोक सेवा अधिकरण अधिनियम में संशोधन किया है। इसमें अध्यक्ष की आयु 70 से 65 और सदस्य की अधिकतम आयु 65 से 62 वर्ष की गई है। हर बूंद से अधिक सिंचाई योजना में अनुदान की राशि बढ़ाई गई है। इसके तहत लघु और सीमांत किसानों को 55 प्रतिशत की जगह 90 और अन्य किसानों को 45 प्रतिशत की जगह 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इस योजना से 50 हजार हेक्टेयर सिंचाई ज्यादा होगी और तत्काल 60 हजार किसानों को लाभ मिलेगा।

नई औद्योगिक नीति को सरकार ने रोजगार से जोड़ते हुए नियमावली बनाई है। उद्यमी जितना अधिक रोजगार देंगे उतना अधिक उन्हें रियायत मिलेगी। इसीलिए सरकार ने मेगा परियोजनाओं के लिए अब अलग मानक बना दिए हैं। मंत्री सतीश महाना ने बताया कि बुंदेलखंड और पूर्वांचल में सौ करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने या 500 से अधिक रोजगार प्रदान करने वाली इकाई और गाजियाबाद व गौतमबुद्ध को छोड़कर मध्यांचल और पश्चिमांचल में 150 करोड़ रुपये से अधिक निवेश या 750 से अधिक लोगों को रोजगार देने वाली इकाइयों को मेगा इकाई का दर्जा मिलेगा।

सरकार ने तय किया है कि गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 200 करोड़ रुपये से अधिक और 500 करोड़ रुपये तक निवेश तथा एक हजार से अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों को मेगा इकाई का दर्जा दिए जाने पर विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। महाना के मुताबिक इन दोनों क्षेत्रों में 500 से एक हजार करोड़ रुपये निवेश और दो हजार रोजगार देने पर मेगा प्लस और एक हजार करोड़ से अधिक निवेश तथा चार हजार रोजगार देने पर सुपर मेगा श्रेणी मिलेगी। सरकार ने तय किया कि न्यूनतम दो सौ कुशल एव अकुशल प्रत्यक्ष रोजगार सृजन करने वाली इकाइयों को ईपीएफ के नियोक्ता अंश की अतिरिक्त प्रतिपूर्ति की सुविधा दी जाएगी।

पश्चिमी उप्र में 400 से अधिक श्रमिकों या बुंदेलखंड, पूर्वांचल व मध्यांचल में दो सौ से अधिक अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला, दिव्यांग, बीपीएल श्रेणी श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने वाली औद्योगिक इकाइयों के नेट वैट, सीएसटी, जीएसटी के तहत अतिरिक्त दर से प्रतिपूर्ति कराये जाने का भी विशेष प्रावधान किया गया है।

source-DJ