२० साल पहले सबसे पसंदीदा मुल्क का दर्ज वापस ले सकता है भारत – पाकिस्तान को मिला था यह दर्ज

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उड़ी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को डिप्लोमेसी से अलग-थलग करने की पूरी तैयारी कर ली है। 29 सितंबर को नरेंद्र मोदी पाक को मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का स्टेटस दिए जाने का रिव्यू करेंगे। इसमें फॉरेन और कॉमर्स डिपार्टमेंट के अफसर हिस्सा लेंगे। इससे पहले सोमवार को सिंधु जल समझौते पर हुई मीटिंग में मोदी ने कहा था, “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।” खबरें ये भी है कि भारत पाकिस्तान से MFN स्टेटस छीन सकता है। 1996 में भारत ने पाक को MFN का दर्जा दिया था। इस बीच, नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा है कि अगर भारत ने सिंधु समझौता तोड़ा तो पाक इंटरनेशनल कोर्ट जाएगा। एसोचैम ने अपनी रिपोर्ट में ये कहा था…
– 2015-16 में भारत का कुल व्यापार 641 बिलियन डॉलर का रहा था। इसमें पाकिस्तान के साथ महज 2.67 बिलियन डॉलर का बिजनेस हुआ।
– भारत ने पाकिस्तान को 2.17 बिलियन डॉलर (कुल एक्सपोर्ट का 0.83%) का एक्सपोर्ट किया, जबकि पाकिस्तान से भारत को 50 करोड़ डॉलर का इम्पोर्ट (कुल का 0.13%) किया गया।
– एसोचैम के जनरल सेक्रेटरी डीएस रावत के मुताबिक, “पाकिस्तान के साथ भारत का जिस तरह व्यापार है, उसके आधार पर पाक को MFN दिया जाए या नहीं, उसके साथ बाइलेटरल ट्रेड पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।”
– रावत ने ये भी कहा, “भारत ने पाक को MFN स्टेटस दिया था, लेकिन उसने कोई रिस्पॉन्ड नहीं किया।”
– “राजनीतिक कारणों के चलते भी दोनों देश एक-दूसरे में यहां इंटरेस्ट नहीं दिखा रहे। इंडिया इंक ने मोदी के बिजनेस बढ़ाने के प्रयासों में रुचि दिखाई है, लेकिन रणनीतिक फैसले पूरी तरह से सरकार के हाथ में होते हैं।”
भारत-पाक ने कब किए थे साइन?
– MFN स्टेटस का आधार 1996 में WTO का जनरल एग्रीमेंट ऑन टैरिफ एंड ट्रेड (GATT) था।
– भारत-पाक ने MFN स्टेटस पर साइन किए थे। इसके मुताबिक, दोनों देश आपस में और डब्ल्यूटीओ के बाकी मेंबर देशों को व्यापार में अहमियत देंगे।
– बता दें कि पाकिस्तान ने अभी तक भारत को व्यापार के लिए पसंदीदा देशों का दर्जा नहीं दिया है।
सिंधु जल समझौते को लेकर आमने-सामने भारत-पाक
– मोदी ने सिंधु जल समझौते पर 26 सितंबर को रिव्यू मीटिंग की। इसमें विदेश सचिव एस. जयशंकर, नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल और पीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्र शामिल हुए थे। सूत्रों के मुताबिक मोदी ने कहा, “पानी और खून एक वक्त में एक साथ नहीं बह सकते।”
– इस बीच, 27 सितंबर को पाक मीडिया ने सरताज अजीज के हवाले से खबर दी, “अगर भारत सिंधु जल समझौते को तोड़ता है तो पाक मसले को इंटरनेशनल कोर्ट में ले जाएगा।”
– सरताज ने ये भी कहा, “सिंधु समझौते को करगिल और सियाचिन वॉर के वक्त भी नहीं तोड़ा गया था। इंटरनेशनल लॉ के मुताबिक, भारत अकेले संधि अलग नहीं हो सकता।”
क्या है सिंधु जल समझौता?
– सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) 1960 में हुआ। इस पर जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान ने दस्तखत किए थे।
– समझौते के तहत छह नदियों- ब्यास, रावी, सतलज, सिंधु, चेनाब और झेलम का पानी भारत और पाकिस्तान को मिलता है। पाकिस्तान आरोप लगाता रहा है कि भारत उसे समझौते की शर्तों से कम पानी देता है। वो दो बार इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल में शिकायत भी कर चुका है।
– समझौते के मुताबिक सतलज, व्यास और रावी का अधिकांश पानी भारत के हिस्से में रखा गया जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का अधिकांश पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया।

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