इलाहाबाद हाईकोर्ट में अखिलेश यादव की समाजवादी एम्बुलेंस में घोटाले पर याचिका दायर

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अमित मिश्रा की ओर से अखिलेश यादव सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट समाजवादी 108 एम्बुलेंस सेवा और 102 एम्बुलेंस सेवा में सौ करोड़ से अधिक के घोटाले का आरोप लगा जनहित याचिका दायर की है। जिस पर कोर्ट ने सरकार तथा सेवा प्रदाता कंपनी से 20 मार्च तक जवाब मांगा है|

आज याची अमित मिश्रा की ओर से एडवोकेट चंदन श्रीवास्तव व रवि सिंह सिसोदिया ने परिवार कल्याण मंत्री रविदास मेहरोत्रा के तमाम पत्र आरोपों के समर्थन में पेश करते हुए, पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग की। याचिका का वरिष्ठ अधिवक्ता एसके कालिया ने विरोध किया। इसके बाद भी हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रदेश सरकार से पूछा कि क्या इस मामले की कोई जांच सरकार ने करवाई है? यदि नहीं तो क्यों नहीं? न्यायालय ने इस याचिका पर प्रदेश सरकार को जवाब देने का आदेश दिया है। इस जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला तथा न्यायमूर्ति एसएन सिंह ने सुनवाई की|

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट समाजवादी स्वास्थ्य सेवा (108) की शुरुआत जनता के लिए की गई थी। चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए इस सुविधा की शुरुआत की गई थी। सेवा जनता को मुफ्त में उपलब्ध करायी जाती रही है। इस सेवा के माध्यम से मरीज को अस्पताल तक पहुँचाने के लिए एम्बुलेंस मुफ्त में दी जाती है। इसके लिए मरीज को 108 नंबर डायल करना होता है|

उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा एम्बुलेंस सेवा 108 और 102 के संचालन के लिए दिनांक 11 नवम्बर 2011 से 2016 के बीच 5 साल की अवधि के लिए 798.50 करोड़ का बजट दिया गया। जिसमें प्रति एम्बुलेंस 1.17 लाख रूपये के हिसाब से प्रतिमाह बजट दिया गया। साथ ही प्रतिवर्ष 10 फीसदी अनुवृद्धि के बाद 1.88 लाख रूपये देने का प्रावधान भी है|

इस एम्बुलेंस सेवा के संचालन में तमाम अनियमितताएं सामने आने लगी हैं। एम्बुलेंस कर्मी के वेतन वृद्धि के नाम पर शोषण के अलावा कुछ नही मिला। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी कई बार इस स्वास्थ्य सेवा पर अपनी पीठ थपथपा चुके हैं, लेकिन इस स्वास्थ्य सेवा को ऑपरेट करने वाले कर्मचारियों का जमकर शोषण होता है। उनसे जबरन ओवरटाइम कराया जाता है जबकि ओवरटाइम का कोई भी अतिरिक्त पैसा नही दिया जाता है|

कई गाडिय़ां खड़ी होकर भी लाखों का तेल गटक जाती हैं। इन गाडिय़ों के लिए तेल के नाम पर बटोरे जाने वाले पैसे कंपनी के बड़े अधिकारी अपनी जेब मजबूत करते हैं|