सुप्रीम कोर्ट का फैसला, दो वयस्कों की शादी को रोकना गैरकानूनी

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सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायत के फैसले पर आपत्ति जताते हुई इससे जुड़े एक केस पर फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा, खाप पंचायत या किसी गैरकानूनी जमावडे द्वारा दो व्यस्कों की शादी को रोकना पूरी तरह गैरकानूनी है. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों की रोकथाम और सजा के लिए गाइडलाइन जारी की हैं. कोर्ट ने कहा कि ये गाइडलाइन तब तक जारी रहेंगी जब तक कानून नहीं आता है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट को तय करना था कि खाप पंचायत व अन्य को लेकर कानून आने तक कोई गाइडलाइन जारी की जाएं या नहीं. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ऑनर किलिंग IPC में हत्या के अपराध के तहत कवर होती है, ऑनर किलिंग को लेकर लॉ कमिशन की सिफारिशों पर विचार हो रहा है. इस संबंध में 23 राज्यों के विचार प्राप्त हो चुके हैं. 6 राज्यों के विचार आने बाकी है, इस दौरान सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर सकती है.

केंद्र ने कहा कि कोर्ट सभी राज्यों को हर जिले में ऑनर किलिंग को रोकने के लिए स्पेशल सेल बनाने के निर्देश जारी करे. अगर कोई युगल शादी करना चाहता है और उसे जान का खतरा है तो राज्य उनके बयान दर्ज कर कार्रवाई करे. केंद्र ने कहा कि वो खाप पंचायत शब्द का इस्तेमाल नहीं करेगा. दरअसल बेंच ने 2010 में एनजीओ ‘शक्ति वाहिनी’ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों को सम्मान के लिए अपराधों को रोकने और नियंत्रित करने की मांग की गई थी. इस मामले में वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कहा था कि यह वातावरण है खापों की इच्छाओं के विरुद्ध दंपतियों के परिवारों ही उनको मारने के लिए कदम उठा रहे हैं.

वहीं एक हलफनामे में रोहतक के सर्व खाप पंचायत ने कहा था कि “सम्मान के लिए हत्याओं के मुख्य अपराधियों में खाप के प्रतिनिधि नहीं बल्कि प्रभावित जोड़ों के करीबी और प्रियजन खासतौर से अधिक लड़कियों के रिश्तेदार है जो सामाजिक दबाव का विरोध नहीं कर सकते इलाके और रिश्तेदारों के ताने नहीं सह सकते. खाप के आचरण और भूमिका को विनियमित करने के किसी भी प्रयास से सम्मान के लिए हत्याओं की घटनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. खाप अलग-अलग जातियों, धर्मों, पंथों या क्षेत्रों से जोड़ों से जुड़े विवाहों के खिलाफ नहीं है. खाप केवल गोत्र विवाह के खिलाफ है जिसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार को हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 में संशोधन करने की मांग की थी, जो लोकतांत्रिक कानून है. उन्होंने कहा कि कानून आयोग ने उनसे परामर्श किए बिना खाप की गतिविधियों को रोकने के लिए कदमों की सिफारिश की थी.