सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को बताया असंवैधानिक, PM मोदी ने कहा इससे मुस्लिम महिलाओं को बराबरी से जीने का हक मिलेगा

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तीन तलाक पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक पीठ के तीन जजों ने इसे असंवैधानिक बताया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय ऐतिहासिक है। इससे मुस्लिम महिलाओं को बराबरी से जीने का हक मिलेगा। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस फली नरीमन, जस्टिस जोसेफ कुरियन ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए कहा- इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन होता है।

जबकि इससे पहले चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि तीन तलाक धार्मिक प्रक्रिया और भावनाओं से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे एकदम से खारिज नहीं किया जा सकता।

खेहर ने कहा कि इस मुद्दे पर सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है संसद और केंद्र सरकार, उन्हें ही इस पर कानून बनाना चाहिए। सरकार को कानून बनाकर इस पर एक स्पष्ट दिशा निर्देश तय करने चाहिए। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इसके लिए केंद्र सरकार को छह महीने का समय दिया। खेहर ने कहा कि छह महीने तक के लिए कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए तीन तलाक पर तत्काल रोक लगाती है। इस अवधि में देशभर में कहीं भी तीन तलाक मान्य नहीं होगा।

तीन तलाक के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पांच जजों की संवैधानिक बैंच के तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले पर कानून बनाने के लिए कहा है।

1- जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस फली नरीमन, जस्टिस जोसेफ कुरियन ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए कहा- इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन होता है।

2- तीन तलाक के इस बड़े मामले पर चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि तीन तलाक धार्मिक प्रक्रिया और भावनाओं से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे एकदम से खारिज नहीं किया जा सकता। खेहर ने कहा- केंद्र सरकार को इस पर कानून बनाना चाहिए। खेहर ने कहा कि छह महीने तक के लिए कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए तीन तलाक पर तत्काल रोक लगाती है।

3- चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मामले पर अपनी राय रखते हुए कहा कि तलाक ए बिद्दत अनुच्छेद 14,15,21 और 25 का उल्लंघन नहीं है। जस्टिस खेहर ने ये भी कहा कि तलाक-ए-बिद्दत सुन्नी सम्प्रदाय की 1000 साल पुरानी आंतरिक परम्परा है।

4- जस्टिस नरीमन ने ट्रिपल तलाक पर फैसला सुनाते वक्त कहा कि 1934 एक्ट का हिस्सा है जिसे संवैधानिक कसौटी पर कसा जाना चाहिए।

5- जस्टिस कुरियन ने कहा ट्रिपल तलाक इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है। इन मामलों में अनुच्छेद 25 का संरक्षण नहीं मिल पाता है।