किसानों की कर्ज माफी का खर्च राज्य सरकारों को ही उठाना पड़ेगा: केंद्र सरकार

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पिछले साल 18 नवंबर को केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जो लिखित जानकारी दी है उसके मुताबिक़ देश के किसानों पर अलग अलग बैंकों का लगभग 12 लाख 60 हज़ार करोड़ रूपया बक़ाया है. बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में सरकार बनने पर लघु और सीमांत किसानों का कर्ज़ माफ़ करने का ऐलान किया था. अटकलें थीं कि कर्ज़ माफ़ी का भार केंद्र सरकार उठाएगी लेकिन सरकार ने साफ़ कर दिया है कि इसका भार राज्य सरकार को ही उठाना पड़ेगा.

केंद्र सरकार के मुताबिक

30 सितंबर 2016 तक किसानों पर कुल 12 लाख 60 हज़ार करोड़ रूपये का कर्ज़ है.इनमें 7 लाख 75 हज़ार करोड़ रूपया फ़सली कर्ज़ है जबकि 4 लाख 85 हज़ार करोड़ रूपया अवधि कर्ज़ है.

सबसे ज्यादा कर्ज़ देश के वाणिज्यिक सरकारी बैंकों का बकाया है जो लगभग 9 लाख 57 हज़ार करोड़ रूपया यानि 76 फीसदी है. सहकारी बैंकों का 1 लाख 57 हज़ार करोड़ रूपया बाक़ी है जबकि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का किसानों पर बकाया 1 लाख 45 हज़ार करोड़ रूपया बकाया है.

इनमें फ़सली और अवधि, दोनों तरह के कर्ज़ शामिल हैं. केवल उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2016-17 के दिसंबर तक 60,179 करोड़ रूपये किसानों को कर्ज़ के तौर पर बांटे जा चुके हैं

देश में किसानों की संख्या कितनी है और उन किसानों के पास ज़मीन कितनी है ?

2011 की जनगणना के मुताबिक़ देश में क़रीब 11 करोड़ 90 लाख खेती करने वाले लोग हैं. इनमें खेतिहर मज़दूरों का आंकड़ा शामिल नहीं है. ये देश की कुल श्रम बल संख्या 48 करोड़ का लगभग 24.6 फीसदी है.

रोचक बात ये है कि 1951 में खेती करने वाले लोगों का अनुपात 50 फीसदी था. वहीं 2015 की कृषि आधारित गणना के मुताबिक़ इनमें से 67 फीसदी वैसे छोटे किसान हैं जिनके पास 1 हेक्टेयर से कम भूमि है. जबकि केवल 1 फीसदी किसानों के पास 10 हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन है

ये मुद्दा सियासी तौर पर हमेशा से संवेदनशील रहा है. ऐसे में कर्ज़ देने वाली एजेंसियां चाहे कुछ भी कहें लेकिन सरकारें किसानों को राहत के नाम पर समय समय पर कर्ज़ माफ़ी स्कीमों की घोषणाएं करती रही हैं.

हाल में उत्तर प्रदेश के चुनावों में भी बीजेपी ने ऐसा ही वादा किया है. हालांकि मोदी सरकार बार-बार ये बात कह रही है कि इन कर्ज़ माफ़ी में केंद्र की कोई भूमिका नहीं होगी और इसका भार भी उन्हीं राज्यों को उठाना पड़ेगा जो ये फ़ैसला करेंगे.