योगी सरकार किसानों से किया वादा पूरा करने के लिए कर्ज लेगी

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राज्य सरकार किसानों की कर्जमाफी के वादे को निभाने के लिए कर्ज लेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योजना के क्रियान्वयन के लिए अफसरों के साथ लगातार विमर्श किया है। उनके निर्देश पर वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल फसली ऋण माफी एवं बजट के लिए लगातार विभागीय अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। मंगलवार को भी इसके दृष्टिगत किसानों की कर्जमाफी के विभिन्न प्रस्तावों पर विचार किया। उधर, मुख्यमंत्री ने गृह और पुलिस तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी कई प्रमुख दिशा निर्देश दिए हैं।
सरकार इस नतीजे पर पहुंची है कि किसानों के कर्जमाफी के फलस्वरूप माफ की गयी धनराशि का भुगतान राज्य सरकार द्वारा बैंकों को किया जाएगा। यद्यपि सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के लागू होने के कारण राज्य सरकार पर लगभग 25 हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष अतिरिक्त व्यय भार आ गया है। साथ ही लोक कल्याण संकल्प पत्र-2017 में जनभावनाओं में दृष्टिगत प्रदेश सरकार की ऐसी अनेक प्रतिबद्धताएं हैं, जिनमें सरकार के लिए बड़ी वित्तीय चुनौतियां हैं। फिर भी संकल्प पत्र-2017 के वादों को निभाने के लिए भाजपा सरकार ने कमर कस ली है।
किसानों के फसली ऋणमाफी से पडऩे वाले वित्तीय बोझ को वहन करने वाले कई प्रस्ताव मुख्यमंत्री के सामने आये हैं। सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अनुदान संख्या-32 के तहत ट्रांसफर-टू-स्टेट मद से सहयोग प्राप्त करना और राज्य सरकार द्वारा ऋण लिया जाना प्रमुख है। हालांकि राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंध अधिनियम (एफआरबीएम) एक्ट के तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार द्वारा ऋण लिये जाने की सीमा निर्धारित है।
किसानों का कर्ज माफ करने के लिए राज्य सरकार को अतिरिक्त ऋण लेने की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार के अतिरिक्त ऋण हेतु किये जाने वाले बंध पत्रों की धनराशि तथा उस पर लगने वाले ब्याज को एफआरबीएम एक्ट के अन्तर्गत निर्धारित ऋण सीमा से बाहर रखने का अनुरोध करेगी। क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से बंध पत्र निर्गत किये जाने के लिए केंद्र सरकार की अनुमति प्राप्त की जानी आवश्यक है।
कृषि गणना 2011 के अनुसार राज्य में 2.30 करोड़ किसान हैं। इनमें लघु और सीमांत किसान सवा दो करोड़ हैं। इनमें सीमांत किसान 1.85 करोड़ और .30 करोड़ लघु किसान हैं। वर्ष 2013-14 के रबी मौसम से 015-16 के रबी मौसम तक लगातार दैवी आपदा के कारण फसलों का उत्पादन एवं उत्पादकता अत्यधिक प्रभावी रही है, लघु और सीमांत किसानों की आर्थिक दशा काफी खराब होने के कारण योगी सरकार अब इस दिशा में कदम बढ़ने जा रही है|