जयललिता के निधन से अब तक 280 की मौत

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जयललिता की बीमारी और फिर निधन की खबर सुनकर दुख और सदमे की वजह से अब तक 280 लोगों की मौत हो चुकी। पार्टी ने मरने वालों के परिवार को 3 लाख रुपए मुआवजा देने का एलान किया है। शनिवार को पार्टी ने इन लोगों की लिस्ट जारी की है। वहीं, जयललिता को श्रद्धांजलि देते हुए सीएम पन्नीरसेल्वम ने पहली कैबिनेट मीटिंग की।
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, AIADMK ने बताया कि इन 280 लोगों में से 203 लोग चेन्नई, वेल्लोर, तुरुवालोर, तिरुवअनंतपुरम, कुड्डलोर, कृषिनगर, एरोड और तिरुपुर जिलों के हैं।इससे कुछ दिन पहले पार्टी ने 77 लोगों की लिस्ट जारी की थी। जयललिता 75 दिन तक चेन्नई के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती रहीं। इस दौरान उनके समर्थक 24 घंटे हॉस्पिटल के बाहर खड़े रहे।जब जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में सजा होने पर जेल जाना पड़ा था। तब भी कथित तौर पर दुखी हो कर उनके कई समर्थकों ने अपनी जान देने की कोशिश की थी। उस वक्त भी कई लोगों के मरने की खबरें आई थीं। पार्टी ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि मरने वालों की यह तादाद 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए जाने के वक्त से है या चार दिसंबर को दिल का दौरा पड़ने से। कुछ दिन पहले सेंटल इंटेलिजेंस एजेंसीज ने 30 लोगों के मरने और चार लोगों के सुसाइड करने की पुष्टि की थी। मीडिया में यह खबरेंं भी आईं कि कथित रूप से सुसाइड की कोशिश करने वाले पार्टी वर्कर्स और अपनी उंगलियां काट लेने वाले लोगों को भी AIADMK ने 50-50 हजार रुपये देने का एलान किया था|
मुरुथुर गोपालन रामचंद्रन (MGR) ने डीएमके से अलग होकर 1972 में एआईएडीएमके पार्टी बनाई और 5 साल बाद ही सीएम भी बन गए। एमजीआर जयललिता के मेंटर थे। वे ही अम्मा को राजनीति में लाए थे।एआईएडीएमके के फॉलोअर्स MGR को भगवान से कम नहीं मानते थे। MGR के निधन के वक्त पूरे तमिलनाडु में दंगे शुरू हो गए थे।
उस वक्त की मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं, “भीड़ ने दुकानों, सिनेमाघरों, पब्लिक और प्राइवेट प्रॉपर्टी को निशाना बनाना शुरू कर दिया था।”MGR के फ्यूनरल को अब तक के सबसे ज्यादा वॉयलेंट फ्यूनरल में से एक माना जाता है।
इस अंतिम संस्कार में 10 लाख लोग शामिल हुए थे, जिन्हें संभालना पुलिस के लिए नामुमकिन साबित हो रहा था।
इसी दौरान हिंसा भड़क गई, जिसमें 29 लोगों की जान चली गई और 47 पुलिसवाले बुरी तरह घायल हो गए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, MGR की मौत के बाद दुखी होकर 30 लोगों ने खुदकुशी भी कर ली थी।
लगातार दूसरी बार 2016 में सरकार बनाने के बाद MGR और जयललिता की लोकप्रियता की तुलना की जाने लगी।इसकी एक झलक तब देखने को मिली, जब बेंगलुरु कोर्ट ने उन्हें दोषी बताया था। इस दौरान AIADMK के वर्कर्स बेकाबू हो गए थे और उन्होंने पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया था।इसके बाद जब जयललिता की सेहत बिगड़ी और हालात गंभीर हो गए तो केंद्र ने पूरे मामले पर नजर बनाए रखी।गृहमंत्री खुद हालात पर नजर रख रहे थे, ताकि 1987 जैसी घटनाएं दोहराई ना जा सकें|