श्रेया घोषाल के नाम पर यह उपलब्धि, पहली भारतीय गायिका बनी

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श्रेया घोषाल पहली भारतीय गायिका बन गयी हैं, जिनके मोम के पुतले को मादाम तुसाद के संग्रहालय में लगाया जाएगा. श्रेया घोषाल का मोम का पुतला मादाम तुसाद की दिल्ली शाखा में लगाया जाएगा. घोषाल का पुतला गायिकी के अंदाज में दिखेगा. श्रेया ने कहा, ‘मैं यहां मादाम तुसाद में इतिहास का हिस्सा बनकर रोमांचित हूं और प्रतिभाशाली सितारों, कलाकारों और इतिहासकारों के बीच जगह मिलना सम्मान की बात है. सदा के लिए अमर हो जाना काफी शानदार अहसास है. अपनी सर्वश्रेष्ठ अवधारणा के साथ मादाम तुसाद दुनियाभर को खुश करने के लिए मशहूर हैं.’

मर्लिन एंटरटेनमेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के महाप्रबंधक और निदेशक अंशुल जैन ने कहा, ‘हम दिल्ली म्यूजियम में श्रेया के पुतले का अनावरण करके खुश हैं. वह आज की पीढ़ी की सबसे पसंदीदा गायिकाओं में से एक हैं. हम अपने दर्शकों को उनके साथ गाते हुये देखने के लिए उत्साहित हैं.’

उन्होंने कहा, ‘वह उन लोगों में से एक है जिन्हें म्यूजियम में शामिल करने के लिए सबसे ज्यादा आग्रह किया गया और हम मोम के इस पुतले के साथ उनके प्रशंसकों का सम्मान करने में सक्षम होने पर खुश हैं.’

यह म्यूजियम प्रतिष्ठित रीगल बिल्डिंग में खोला जाएगा. यहां पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन और शाहरख खान के मोम के पुतले भी होंगे.

मालूम हो कि मूलरूप से राजस्थान के रावतभाटा की रहने वाली श्रेया घोषाल ने चार साल की उम्र से हारमोनियम पर अपनी मां के साथ संगीत सीखना शुरू कर दिया था.

श्रेया घोषाल ने अपने संगीत के सफर की शुरुआत 1996 में जी टीवी के शो ‘सा रे गा मा’ में बतौर एक बाल कलाकार भाग लेकर की. 12 साल की उम्र में श्रेया घोषाल अपना हुनर लेकर ‘सा रे गा मा’ के मंच पर दुनिया के सामने थीं.

श्रेया घोषाल ने 2002 में आई ‘देवदास’ में ‘बैरी पिया’, ‘छलक-छलक’, ‘डोला रे’, ‘सिलसिला ये चाहत का’ और ‘मोरे पिया’ गीत गाए. ‘डोला रे’ एक गीत इतना हिट हुआ कि वे चोटी की पार्श्व गायिकाओं में शूमार हो गईं.