एक अप्रैल को ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा लेगी बड़ा फैसला, भाजपा से सीटों को लेकर है विवाद

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उत्तर प्रदेश में भाजपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के बीच लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भाजपा की तरफ से इस मसले पर कोई जवाब नहीं मिलने से नाराज सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अब यूपी सरकार में बने रहने या नहीं रहने और लोकसभा चुनाव की रणनीति को लेकर अपने फैसले का खुलासा आगामी एक अप्रैल को होने वाली बैठक के बाद करेगी।

सुभासपा अध्यक्ष और योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरुण राजभर ने कहा है कि एक अप्रैल को पार्टी के कार्यकर्ताओं की एक बैठक लखनऊ में होगी। उनका कहना था कि इस बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव की रणनीति और योगी सरकार में बने रहने को लेकर सुझाव लिए जाएंगे। उसके बाद पार्टी कोई फैसला करेगी।

चर्चाएं हैं कि भाजपा से सीटें नहीं मिलने पर 53 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है और इसके साथ ही उसका फैसला उत्तर प्रदेश में सरकार और एनडीए से अलग होने का भी हो सकता है। सुभासपा के राष्ट्रीय सचिव अरुण राजभर का कहना था कि जब उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ लड़ेगी, तो फिर गठबंधन कैसा? पार्टी भाजपा सरकार के मंत्री पद के साथ निगम और बोर्ड के पदों को भी छोड़ देगी। अरुण राजभर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा घमंड में चूर है और उसे गलतफहमी है, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद अपनी गलती का एहसास होगा।

बताते चलें कि पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में अपना दल के साथ चुनाव लड़ने वाली भाजपा ने 73 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा ने अपना दल को फिर दो सीटें देने का ऐलान किया है। ताजा चर्चाएं यह भी हैं कि भाजपा निषाद पार्टी से भी गठबंधन कर सकती है और उसे भी गोरखपुर समेत दो सीटें दे सकती है। ऐसी चर्चाओं पर अरुण राजभर ने दावा किया कि सुभासपा का जनाधार और लोकप्रियता निषाद पार्टी की तुलना में कहीं ज्यादा है।

सुभासपा ने साल 2017 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में आठ विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से उसे चार पर जीत मिली थी। इसके अलावा पार्टी का दावा है कि उसने भाजपा को करीब सवा सौ सीटें जीतने में मदद की। बताते चलें कि लोकसभा सीटों के मसले पर पार्टी ने भाजपा को पहले 26 मार्च तक का अल्टिमेटम दिया था, लेकिन बाद में जल्दबाजी में कोई कदम उठाने की बजाय पांच दिन और इंतजार करने का फैसला हुआ।