आखिरी चरण के लिए सुभासपा ने झोंकी पूरी ताकत, ओम प्रकाश राजभर का सियासी भविष्य है दांव पर

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लोकसभा चुनाव के छह चरण पूरे हो चुके हैं और अब आखिरी चरण का मतदान बचा है जिसमें 19 मई को वोट डाले जाएंगे। इस आखिरी चरण के लिए चुनाव प्रचार जोरों पर है। यूपी में इस चरण में पूर्वांचल की 13 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। इस चरण में भाजपा और सपा-बसपा गठबंधन के बीच बेहद कड़ा मुकाबला है साथ ही यह चरण सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के लिए भी बेहद अहम है।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, उनके बेटे अरविंद राजभर और अरुण राजभर के साथ ही पार्टी के सभी स्टार प्रचारक अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचार कर रहे हैं। ओम प्रकाश राजभर ने रविवार को देवरिया में अपनी पार्टी के उम्मीदवार जितेंद्र राजभर के लिए प्रचार किया। उन्होंने कहा कि पिछड़े, अतिपिछड़े, गरीब लोग उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को चुन कर भेजेंगे तभी उनकी आवाज देश की सबसे बड़ी पंचायत में सुनी जाएगी।

लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर व राबर्ट्सगंज में 19 मई को मतदान होगा। चुनाव का यह आखिरी चरण राजभर के लिए बेहद अहम है क्योंकि इस चरण में पूर्वांचल की उन 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं जहां पर उनकी पार्टी की सक्रियता सबसे ज्यादा है। इस चरण के चुनाव नतीजे जैसे रहेंगे वह राजभर का सियासी कद तय करेंगे।

लोकसभा चुनाव में राजभर की पार्टी सुभासपा ने भाजपा से नाराजगी के चलते अपने उम्मीदवार उतारे और पार्टी साफ कहती है कि वह भाजपा को हराने के लिए चुनाव लड़ रही है। आखिरी चरण की इन सीटों पर पिछले चुनाव में सभी पर भाजपा गठबंधन ही जीता था इसीलिए उसके सामने चुनौती सभी सीटों बचाए रखने की है।

भाजपा को अगर चुनाव में नुकसान हुआ तो राजभर यह कहने की स्थिति में होंगे कि उनकी अनदेखी से ही भाजपा हारी, इससे वह अपना सियासी कद और बढ़ा पाएंगे और 2022 के विधानसभा चुनावों में जिस भी गठबंधन के साथ रहेंगे उसके साथ ज्यादा  मोलभाव करने की स्थिति में रहेंगे। लेकिन अगर भाजपा फिर से इन सीटों पर जीत गई तो राजभर के लिए अपनी सियासी जमीन को बचाए रख पाना भी काफी मुश्किल होगा।