गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में हुए हादसे का छठा आरोपी संजय त्रिपाठी हुआ गिरफ्तार

50
SHARE

बाबा राघवदास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में हुई मासूमों की हुई मौत मामले में छठवां आरोपी लिपिक संजय त्रिपाठी गिरफ्तार कर लिया गया है। कल एक आरोपी डॉ. सतीश कुमार ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। जबकि चार आरोपी पहले ही गिरफ्तार किये जा चुके हैं। तीन आरोपी अभी भी फरार हैं।

9/10-11 अगस्त को बीआरडी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की कमी के चलते चार दर्जन से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी। मामला काफी उछलने के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया गया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद मेडिकल के पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र व उनकी पत्नी समेत नौ जिम्मेदारों को आरोपी बनाया गया था। इसके बाद डीजीएमई डॉ. केके गुप्ता की तहरीर पर हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज हुआ। बाद में यह मामला गोरखपुर के गुलरिहा थाने में स्थानांतरित हो गया।

केस दर्ज होने के बाद सभी आरोपी फरार हो गए। इनको पकड़ने के लिए स्थानीय पुलिस के अलावा एसटीएफ लगाई गई। एसटीएफ ने सबसे पहली गिरफ्तारी पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र व उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला की कानपुर में की। इसके बाद सहजनवा में एसटीएफ ने डॉ. कफील खान को गिरफ्तार किया तो स्थानीय पुलिस ने सुधीर पांडेय को गोरखपुर में ही गिरफ्तार किया। एक दिन पहले सोमवार को डॉ. सतीश कुमार ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। जबकि मंगलवार को छठवां आरोपी संजय त्रिपाठी कैंट पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

आरोपियों पर इन धाराओं में केस है दर्ज
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 308, 120 बी, 420, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 8, इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 के सेक्शन 15, आईटी एक्ट 2000 के सेक्शन 66 के तहत केस दर्ज है।

इन लोगों को है पुलिस को तलाश

लिक्विड ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता पुष्पा सेल्स का मनीष भंडारी

पुष्पा सेल्स ने ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी थी। ऑक्सीजन जीवनरक्षक है। इसकी आपूर्ती बंद करना गुनाह है। इसके लिए आपूर्तीकर्ता मनीष भंडारी के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। मनिष फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से दूर है। इसको गिरफ्तार करना पुलिस के लिए सबसे अहम चुनौती है।

लेखा विभाग का एक कर्मचारी

बीआरडी मेडिकल काॅलेज हादसे में लेखा विभाग के तीन कर्मचारी भी जिम्मेदार हैं। हादसे के पीछे जिस कमीशन की बात सामने आ रही है, उसकी नींव यहीं है। हालांकि, भेजी गई रपट के अनुसार इन पर आरोप है कि जब शासन से बजट आया तो प्राचार्य को बताने में लेटलतीफी की गई। उनके पास पत्रावली देर से पेश की गई। इन आरोपों में कार्यालय सहायक उदय प्रताप शर्मा, लिपिक संजय कुमार त्रिपाठी व सहायक लेखाकार सुधीर कुमार पाण्डेय की संलिप्तता पाई गई। इसलिए इनके खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इनमें से सहायक लेखाकार सुधीर पाण्डये और संजय त्रिपाठी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अभी भी उदय प्रताप शर्मा फरार है।