टिकट बंटवारे पर समाजवादी पार्टी में अभी आग ठंडी नहीं हुई है

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समाजवादी परिवार में 12 सितंबर से नवंबर के दूसरे पखवारे तक चला का बंवडर शांत भले दिख रहा हो मगर आग ठंडी नहीं हुई है। परिवार के सदस्य पार्टी से मिले अधिकार का हवाला देकर फैसले ले रहे हैं, राजनीतिक हलकों में इसे सियासी बिसात पर शतरंजी चाल के रूप में देखा जा रहा है। संघर्ष टिकट बंटवारे के अधिकार पर है जिसके चलते घोषित उम्मीदवारों के टिकट कटने का दौर भी चल रहा है|

दागियों को टिकट से असंतुष्ट अखिलेश ने यह कहकर कि ‘टिकट तो अंतिम समय तक बदलते रहते हैं’ भविष्य में बदलावों को संकेत दिये हैं। एक हफ्ते पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने 23 प्रत्याशियों की सूची जारी की जिसमें दागी अतीक अहमद, सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के हत्या आरोपित बेटे अमनमणि त्रिपाठी व बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई शिगबतुल्ला का नाम शामिल था। मंत्रिमंडल से बर्खास्त होते ही जिन राजकिशोर सिंह ने जनसभा के जरिये तेवर दिखाया, उनके भाई बृजकिशोर सिंह उर्फ डिंपल को रूधौली से टिकट दिया गया|

मंत्री अवधेश प्रसाद के बेटे का टिकट कटा और फिर वापस हुआ। एक राष्ट्रीय महासचिव की करीबी व महिला आयोग की सदस्य के बेटे को टिकट दिया गया, काटा गया और फिर प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। शिवपाल कहते हैं कि टिकट वितरण नेताजी (मुलायम सिंह यादव) की मर्जी से हो रहा और उस पर सभी की सहमति है। अगर ऐसा है तो क्या राष्ट्रीय अध्यक्ष पार्टी के चेहरे अखिलेश से मशविरा नहीं कर रहे? और टिकटों में अगर अखिलेश की भी सहमति है तो फिर वह अंतिम समय तक टिकट बदलते रहने और अपना नजरिया मुलायम के सामने रखने की बात क्यों कह रहे हैं। इन सवालों के जवाब सपा के प्रत्याशी भी नहीं ढूंढ पा रहे हैं|

प्रदेश सरकार के प्रभावशाली मंत्रियों में शुमार कई मंत्री अपना क्षेत्र छोड़कर दूसरे क्षेत्र से चुनाव लडऩे की कवायद में जुट गए हैं, इसके लिए वह पूर्व घोषित प्रत्याशियों का टिकट कटवाने का दांव-पेंच भी आजमा रहे हैं। लखनऊ, बाराबंकी व वाराणसी के कुछ मंत्री अपनी सीट छोड़कर दूसरे क्षेत्र से टिकट मांग रहे हैं। चर्चा यह भी है कि समाजवादी परिवार के एक और सदस्य लखनऊ जिले से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं, उनकी ओर से बख्शी का तालाब व सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र से टिकट मांगा जा रहा है|