कांग्रेस की ओर से की गयी थी १५० सीट्स का डिमांड, अखिलेश एवं शिवपाल की वजह से नहीं हुआ गठबंधन

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यूपी में महागठबंधन की खबरों के बीच मुलायम सि‍ंह ने गुरुवार को कहा कि सपा किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि कोई विलय करना चाहे तो आ सकता है। इस बयान से महागठबंधन पर सपा का स्टैंड क्लियर हो गया है। मुलायम के इस यू-टर्न से कई दल हैरत में हैं। कहा जा रहा है कि मुलायम के इस फैसले के पीछे चाचा-भतीजे की लड़ाई है, जिसकी वजह से सीटों पर सहमति ही नहीं बन पाई। बता दें, पिछले 13 दिनों में प्रशांत कि‍शोर ने महागठबंधन के लिए मुलायम और अखिलेश से 4 बार मुलाकात की थी, लेकिन बात बनते-बनते रह गई।
– सूत्रों की मानें तो मुलायम गठबंधन को राजी थे, लेकिन सबसे बड़ी समस्या पारिवारिक कलह है।
– महागठबंधन सीटों के गणित के चलते गड़बड़ हो गया, क्योंकि शिवपाल और अखिलेश गठबंधन में अपनी सीटें कुर्बान नहीं करना चाहते हैं।
– अखिलेश यादव ज्यादातर सपा की जीती हुई सीट चाहते हैं, जिस पर मनपसंद कैंडिडेट उतार सकें। ये सीटें 210 तक हैं।
– शिवपाल भी जीती हुई सीटों पर अपना कैंडिडेट चाहते हैं। सपा जिन सीटों पर दो नंबर पर रही है, वो सीटें पार्टी अपने पास रखना चाहती है।
सपा देना चाहती थी 55 सीटें: सूत्र
– सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की तरफ से प्रशांत किशोर 125 से 150 सीटें चाहते हैं, जिसमें 2012 चुनाव में जीती हुई 28 सीटें भी शामिल हैं।
– सपा सिर्फ 50 से 55 सीटें ही कांग्रेस को देना चाहती है, जिसमें कांग्रेस की जीती सीटों के अलावा दूसरे नंबर वाली सीटें हैं।
– बता दें, 28 अक्टूबर से ही महागठबंधन के लिए कोशिशें शुरू हो गई थीं, जब शिवपाल रजत जयंती प्रोग्राम का निमंत्रण लेकर दिल्ली में अजीत सिंह से मिले थे।
– रजत जयंती में आने के लिए कई नेताओं को निमंत्रण दिया गया था। यहां जेडीयू नेता केसी त्यागी ने शिवपाल और पीके की मुलाकात कराई थी।
पीके ने समझाया था चुनाव का गणित
– प्रशांत की मुलायम से पहली मुलाकात 1 नवंबर को दिल्ली में हुई थी, जहां बंद कमरे में केसी त्यागी और अमर सिंह भी मौजूद थे।
– पीके ने मुलायम को 150 सीटों के समीकरण के साथ रुझान और जातीय समीकरण भी समझाया था।
– दोबारा पीके लखनऊ में मुलायम से मिले। सूत्र बताते हैं कि पीके ने कहा कि कांग्रेस का भी कोई नेता सपा के मंच पर आना चाहिए।
– पहले कांग्रेस की सीएम फेस शीला दीक्षित का नाम पीके ने आगे बढ़ाया, लेकिन कन्नौज की बहू की टैगलाइन होने की वजह से मुलायम ने मना कर दिया।
– राज बब्बर के नाम पर भी मुलायम सहमत नहीं हुए। सपा की तरफ से प्रमोद तिवारी का नाम सुझाया गया, जिस पर कांग्रेस भड़क गई।