समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के बीच गठबंधन आज लगभग तय

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शीला दीक्षित ने साफ तौर पर कहा कि सीएम की दावेदारी छोड़ देंगी। अब इसके बाद
बुधवार को समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के बीच गठबंधन ऐलान का कभी भी हो सकता है। अखिलेश यादव कांग्रेस के लिए 89 और रालोद के लिए 20 सीटें छोड़ने को तैयार हैं। सपा के 14 कैंडिडेट्स कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। यही वजह है कि यूपी में गठबंधन को लेकर अब कांग्रेस नेता खुलकर बोलने लगे हैं।
हालांकि, गठबंधन के बाद अखिलेश के सामने कई चुनौतियां आने वाली हैं। कांग्रेस ने
सपा के कब्जे वाली 10 से अधिक सीटें मांगी हैं।अगर अखिलेश कांग्रेस की बात मान लेते हैं तो पार्टी में बगावत हो सकती है। इन 10 सीटों के एसपी कैंडिडेट्स बागी होकर निर्दलीय लड़ सकते हैं या बीजेपी और बीएसपी का दामन थाम सकते हैं।यही वजह है कि सपा के 14 कैंडिडेट्स कांग्रेस के सिंबल पर लड़ेंगे। 2012 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 27 और आरएलडी को 9 सीटें मिली थी।बता दें कि कांग्रेस के 8 और आरएलडी के विधायक दल के नेता चौधरी दलबीर सिंह बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।
इलेक्शन कमीशन (ईसी) के फैसले के बाद परिवार की महामीटिंग में यह तय हुआ है कि सारे वाद-विवाद खत्म कर सभी लोग चुनाव में प्रचार करेंगे। मुलायम ने कहा, सत्ता वापसी की खातिर सभी लोग लग जाएं। परिवार की एकता के खिलाफ कोई बयान न दें। उन्होंने अखिलेश को अपने 38 उम्मीदवारों की लिस्ट सौंपी है।बता दें कि ईसी ने पार्टी सिंबल विवाद पर फैसला अखिलेश गुट के फेवर में दिया था।
पिछले तीन असेंबली इलेक्शन में एवरेज सपा को 25% और कांग्रेस को 10 फीसदी वोट मिले हैं। यूपी में 30% वोट पाने वाली पार्टी सरकार बना लेती है। इसके अलावा पश्चिमी यूपी में रालोद को 10% मत मिलते हैं। प्रदेश में 19% मुस्लिम हैं। यह सपा और बसपा के वोटर्स हैं। बसपा ने इस बार 93 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। पिछले बार 67 टिकट दिए थे।अब सपा औऱ् कांग्रेस से गठबंधन पर मुस्लिम वोटर का भरोसा बढ़ेगा। बीजेपी ने पहली लिस्ट में 64 सवर्ण (जिसमें 33 क्षत्रिय और 11 ब्राह्मण), 44 ओबीसी और 26 दलित उतारे हैं। एक मुस्लिम कैंडिडेट्स को टिकट न देकर ध्रुवीकरण करने की भी कोशिश है।
 अब अमर सिंह पार्टी से बाहर हो गए हैं। शिवपाल की चुनाव में भूमिका सीमित होगी।प्रदेश अध्यक्ष पद नहीं मिलेगा। मुलायम सिंह यादव पार्टी के मार्गदर्शक के तौर पर पारी शुरू करेंगे। कौमी एकता दल का विलय रद्द होगा। इस पर अखिलेश नाराज थे। इससे माफिया अतीक अहमद, मुख्तार के भाई सिबगतुल्लाह अंसारी के टिकट कट जाएंगे। टिकट इस लड़ाई में शिवपाल के करीब शादाब फातिमा, अंबिका चौधरी, पिंटू राणा, गायत्री प्रजापति, रामपाल यादव, नारद राय, ओम प्रकाश सिंह का भी टिकट कट सकता है।