सिंधु पर भारत-पाकिस्तान जनवरी तक सुलझा लें मतभेद: विश्व बैंक

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विश्व बैंक ने सिंधु जल समझौते को लेकर चल रही खींचतान के बीच भारत और पाकिस्तान की नई कोशिशों पर रोक लगा दी है। विश्व बैंक का कहना है कि इससे दोनों देशों को समझौते को लेकर मतभेदों के हल और दो पनबिजली परियोजनाओं को लागू करने के विकल्प तलाशने के अवसर मिलेंगे। उसने इस मामले में जनवरी तक दोनों को सहमति कायम करने को कहा है|

विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम ने भारत और पाकिस्तान के वित्त मंत्रियों को लिखे पत्र में कोशिशों को रोकने की घोषणा की। पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि वह समझौते की रक्षा के लिए काम कर रहा है। दोनों देशों की तरफ से चल रही प्रक्रियाओं को रोकने के बाद विश्व बैंक पंचाट का अध्यक्ष या तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति को टाल देगा। उसने पहले कहा था कि 12 दिसंबर को ये नियुक्तियां की जा सकती हैं|

पिछले महीने भारत ने पंचाट के गठन और तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति के विश्व बैंक के फैसले पर कड़ा विरोध जताया था। बैंक ने जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रैटल पनबिजली परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान की शिकायत पर यह फैसला लिया था। भारत सरकार की मांग पर तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति और पाकिस्तान की मांग पर पंचाट गठन के फैसले एक ही साथ लेने को भारत ने कानून सम्मत नहीं बताया। विश्व बैंक ने कहा कि दोनों देशों की प्रक्रियाएं एक ही समय में चल रहीं थीं जिससे विरोधाभासी परिणाम का खतरा हो रहा था। साथ ही इससे समझौते को खतरा हो सकता था। 330 मेगावाट के किशनगंगा और 850 मेगावाट के रैटल पनबिजली संयंत्रों का निर्माण कर रहा है। सितंबर 1960 को हुई संधि-तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाक राष्ट्रपति अयूब खान ने किए हस्ताक्षर किए|

पूर्व और पश्चिम में विभाजित की गईं सिंधु की सहायक नदियां, सिंधु, चेनाब और झेलम का पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया।रावी, ब्यास और सतलज का पानी भारत इस्तेमाल करता है ।सिंधु नदी का कुल क्षेत्रफल 11.65 लाख वर्ग किमी है। 47 फीसद पाकिस्तान में, 39 फीसद भारत में, 8 फीसद चीन में और 6 फीसद अफगानिस्तान में है पाकिस्तान की 16 करोड़ आबादी नदी के पानी पर आश्रित है।2.1 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि में से 80 फीसद की सिंचाई होती है। पाकिस्तान समझौता खत्म करने की शर्तसंधि में हितधारक देशों को विवाद का निपटारा शांतिपूर्वक तरीके से करना होगा। आपसी बातचीत से निपटाना होगा। यदि हल बातचीत से नहीं निकलता तो मामला सिंधु पर बने स्थायी आयोग के पास जाएगा। यदि वह भी विवाद के निपटान में असफल रहता है तो मामला अंतराष्ट्रीय कोर्ट में जाएगा। इसका फैसला सर्वमान्य होगा। गठन से लेकर अब तक आयोग ने भारत और पाकिस्तान में 112 बार बैठकें की हैं। इसे कभी निरस्त नहीं किया गया है। हर छह महीने पर होती है इसकी बैठक।आपात स्थितियुद्ध, हमले या तनाव की स्थिति में कोई भी द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय संधि स्वत: निरस्त मान ली जाती है|