रामनगरी अयोध्या बनेगी विश्व धरोहर

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रामनगरी वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के तौर पर प्रतिष्ठित हो सकती है। किसी नगर को विश्व धरोहर नगरी घोषित करने के लिए यूनेस्को द्वारा जो दस मानक निर्धारित हैं, रामनगरी अयोध्या उन पर तकरीबन खरी उतरती है। अब इसके लिए मुहिम शुरू करने की तैयारी है।

इस मुहिम के सूत्रधार अवध विश्वविद्यालय (अविवि) के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. राना पीवी सिंह और यूनेस्को की इकाई इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मान्यूमेंट्स एंड साइट (आइकोमॉस) के सदस्य शोध छात्र सर्वेश हैं। गत कुछ माह के जमीनी सर्वेक्षण के बाद यह टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि रामनगरी में वह सारी संभावनाएं निहित हैं, जिसके चलते वह वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बन सकती है।

यह सर्वेक्षण अंतिम दौर में है। मिसाल के तौर पर कनकभवन, हनुमानगढ़ी और बाल्मीकि रामायणभवन जैसे मंदिर हैं। यह मानक सप्तहरियों के पौराणिक मंदिरों से भी परिपूर्ण होता है। पौराणिक परंपरा के अनुसार लाखों वर्ष पूर्व महाराज मनु के समय से ही नगरी की ऐतिहासिकता प्रवाहमान है और यदि आधुनिक इतिहास की दृष्टि से देखें, तो भी नगरी की प्राचीनता नौवीं शताब्दी ईसापूर्व से प्रमाणित है।

सरयू के जमथरा तट से लेकर संत तुलसीदासघाट तट तक सर्वे के दौरान सेटेलाइट से अयोध्या का जो भूदृश्य प्राप्त हुआ, वह नौका की शक्ल में है और यह चित्र अयोध्या के संस्थापक माने जाने वाले मनु की उस परंपरा को जीवंत करता है, जिसमें पुराण बताते हैं कि जल प्रलय के दौरान मनु नौका से अयोध्या के तट पर पहुंचे थे।
प्रदेश सरकार के हवाले होगी सर्वे की रिपोर्ट: वर्ल्ड हेरिटेज के लिए सर्वे अंतिम दौर में है। इसकी रिपोर्ट तकरीबन 400 पृष्ठों में संयोजित हो रही है और इस सर्वे की समरी शीघ्र ही प्रदेश सरकार के हवाले होने को है।

ये हैं वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के दस मानक:
– मानव रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व
– वास्तुकला एवं स्मारकों में निहित मानव मूल्य
– सांस्कृतिक परंपरा की प्राचीनता एवं निरंतरता
– भू दृश्य एवं वास्तु की उत्कृष्टता
– परंपरागत निवास स्थल
– सांस्कृतिक उत्तरजीविता
– जीवंत परंपरा एवं अमूर्त धरोहर
– प्राकृतिक सुंदरता
– पारिस्थितिकी
– जैव विविधता

source-DJ