सुभासपा को बड़ी राहत, राजभर संगठन से प्रत्याशी उतारने वाले नेताओं पर गिरी गाज

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भाजपा से नाराज होकर उत्तर प्रदेश में 39 सीटों पर उम्मीदवार उतारने के कुछ ही घंटों बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के सामने बड़ी विकट स्थित आ गई थी। राजभर समाज की नुमाइंदगी करने वाले अखिल भारतीय राजभर संगठन के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष के हस्ताक्षर के साथ 17 लोकसभा सीटों पर संगठन की तरफ से उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया गया था, लेकिन अब संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष त्रिलोकी राजभर ने राजभर प्रत्याशियों की सूची को अवैध करार दिया है।

ओम प्रकाश राजभर के लिए यह बात काफी राहत देने वाली है, क्योंकि संगठन के राष्ट्रीय महासचिव रहे रामकृष्ण भारद्वाज ने मऊ शहर में मीडिया से कहा था कि उनके उम्मीदवार ओम प्रकाश राजभर के उम्मीदवारों के खिलाफ हैं, उन्होंने राजभर पर काफी आरोप भी लगाए थे।

अब अखिल भारतीय राजभर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष त्रिलोकी राजभर ने कहा है कि संगठन एक सामाजिक संगठन है, राजनैतिक नहीं है। इसके सदस्यों की अलग-अलग राजनैतिक विचारधारा हो सकती है, लेकिन सामाजिक विचारधारा एक है। उन्होंने रामकृष्ण भारद्वाज की तरफ से जारी उम्मीदवारों की सूची को अवैध करार दिया है और संगठन को राजनीतिक रूप देने के लिए रामकृष्ण भारद्वाज को राष्ट्रीय महासचिव पद से तथा प्रदेश अध्यक्ष लालचंद राजभर को प्रदेश अध्यक्ष पद से 19 अप्रैल से हटा दिया है। संगठन के अध्यक्ष त्रिलोकी राजभर की तरफ से यह भी कहा गया है कि संगठन में संरक्षक समिति जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।

राजभर संगठन अध्यक्ष की तरफ से इसके कुछ नेताओं द्वारा जारी उम्मीदवारों की सूची को अवैध बताया जाना सुभासपा और इसके अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की बड़ी जीत है, क्योंकि वह प्रमुख रूप से जिस समाज को आगे रख कर राजनीति करते हैं, उसी में फूट दिखाई दे रही थी और ऐसा होना उनकी राजनीति के लिए कतई अच्छा नहीं था।