रेलवे लागू कर लेती IIT के प्रोजेक्ट, नहीं होता कानपुर रेल हादसा

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आईआईटी ने ट्रेन हादसों को रोकने के लिए कई प्रोजेक्ट तैयार किए हैं। रेलवे को यह पसंद भी आए लेकिन लागू नहीं हो सके। इसीलिए रेलवे पुरानी व्यवस्थाओं पर ही चल रहा है। आईआईटी के कई प्रोजेक्ट टीएमआईआर (टेक्नोलॉजी मिशन फॉर इंडियन रेलवेज) को पसंद आने के बावजूद उन पर काम नहीं शुरू हो सका है। अभी तक पैसा नहीं मिला है। रेलवे को तकनीकी क्षेत्र में मजबूत करने के लिए आईआईटी कानपुर लंबे समय से कदम से कदम मिलाकर चल रहा है|मानव रहित क्रासिंगों पर लगातार हो रहे हादसों को रोकने के लिए आईआईटी ने वायरलेस बेस्ड अनमैन्ड लेवल क्रासिंग वार्निंग सिस्टम तैयार किया था। इसके लिए वरुणा एक्सप्रेस और उन्नाव-सोनिक क्रासिंग पर हुआ ट्रायल भी सफल रहा था। तैयार की गई डिवाइस से मानव रहित क्रासिंग में ट्रेन के 1500 मीटर पहले और जाने के 50 मीटर बाद तक सायरन लाल बत्ती के साथ बजना था। नए सिस्टम को मैसेज तकनीकी पर तैयार किया गया है। अगर कोई भी दिक्कत होगी तो तुरंत मैसेज पास के रेलवे स्टेशन पर आएगा। प्रोजेक्ट पसंद आने के बावजूद लागू नहीं हो सका है|

आईआईटी ने ट्रेन हादसों को रोकने के लिए आटोमेटिक फॉल्ट फाइडिंग डिवाइस तैयार की थी। इसके लिए फुलप्रूफ मानीटरिंग सिस्टम तैयार किया गया था। इससे किसी भी तरह का फॉल्ट होने की जानकारी पास के रेलवे स्टेशन को तुरंत मिलनी थी। इसकी भी अतापता नहीं है।रेलवे की ओर से लिया गया आईआईटी कानपुर का प्रोजेक्ट सिमरन इतिहास बन चुका है। 2009 से 2012 तक शताब्दी, राजधानी समेत प्रमुख 36 ट्रेनों में आईआईटी कानपुर की डिवाइस लगाई गई थी। इससे भीषण कोहरा पड़ने के बावजूद ट्रेनों की सही जानकारी और लोकेशन देशवासियों को मिलती थी। 122 करोड़ रुपए भी दिए गए लेकिन इसके बाद सिमरन का कोई अता-पता नहीं लगा|आईआईटी के वैज्ञानिकों ने कोहरे में सिग्नल न दिखने के चलते होने वाले हादसों को बचाने के लिए कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम तैयार किया था। प्रोजेक्ट तैयार होने के बावजूद रेलवे ने कोई ध्यान नहीं दिया।आईआईटी के डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट अमलेन्दु चंद्रा ने दिल्ली जाकर रेलवे रिसर्च सेंटर खोलने के लिए एमओयू को साइन किया था। अभी तक सरकार ने पत्र तक नहीं भेजा गया है। सेंटर ठंडे बस्ते में है|

कंप्यूटर इंजीनियर बीएम शुक्ला ने कहा, पुखराया ट्रेन हादसे से रेलवे को सबक लेना चाहिए। आईआईटी कानपुर ने हादसों को रोकने के कई प्रोजेक्ट तैयार करके रेलवे को दिए हैं। उनको कई प्रोजेक्ट पसंद भी आए लेकिन एक भी लागू नहीं हो सका है। इससे टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रेलवे को मजबूत करने को चल रहे कामों पर ब्रेक लगा है। हादसे के बाद टेक्नोलॉजी मिशन फॉर इंडियन रेलवे को सोचना होगा|