राहुल गांधी कांग्रेसियों को ही स्वीकार नहीं, देश कैसे स्वीकार करे: अनुराग ठाकुर

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हिमाचल प्रदेश के मतदाताओं में 50 प्रतिशत से ज्यादा संख्या 18 से 40 वर्ष के युवाओं की है। देश में युवा आइकन के रूप में विकल्प के रूप में दिखाई दे रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव तिथियों के ऐलान के बाद एक बार भी देवभूमि के चुनावी दौरे पर नहीं आए हैं। जबकि दूसरी ओर सांसद अनुराग ठाकुर प्रदेश भर में सभाओं में व्यस्त हैं। चुनावी सरगर्मी के बीच सूबे के सियासी माहौल और चुनावी तैयारियों को लेकर अमर उजाला के विशेष संवाददाता ने अनुराग ठाकुर से विस्तृत बातचीत की।

अनुराग जी, देश में इस वक्त जो माहौल दिख रहा है, उसमें राहुल गांधी भाजपा और पीएम मोदी का विकल्प बनते दिख रहे हैं। राहुल की चुनौती को भाजपा किस रूप में देख रही है?

राहुल गांधी भाजपा के लिए नहीं बल्कि अपने दल के लिए चुनौती बने हुए हैं। रही बात उनकी स्वीकारोक्ति के बढ़ने की तो जब कांग्रेस पार्टी ही उनको स्वीकार नहीं कर रही है तो देश भला उन्हें कैसे स्वीकार करेगा। अगर राहुल गांधी की लोकप्रियता होती तो हिमाचल प्रदेश कांग्रेस और यहां के पार्टी नेता उन्हें निवदेन करके हिमाचल में उनके दौरे करवाते, लेकिन ऐसा नहीं है।

यहां कांग्रेस पार्टी और उनके नेताओं को ही राहुल में विश्वास नहीं है। मेरा मानना है कि राहुल की असली गंभीरता तब नजर आएगी, जब वे किसी एक वर्ष में एक दिन भी बिना विदेश भ्रमण किए देश में रहकर गुजारें। जब वे डोकलाम जैसे विषय पर चीन के लोगों से मिलने के बजाय अपनों से मिलेंगे तो इससे उनकी समझ का स्तर बढ़ेगा। उन्हें असल में पता चलेगा कि देश को चलाना कैसे है। तभी वे भारत के लायक बन पाएंगे।

श्रीगांधी कांग्रेस की रिजर्व सीट ले सकते हैं, लेकिन देश के पीएम की सीट रिजर्व नहीं है। लोकतंत्र में लोग पीएम को वोट देकर चुनते हैं। बैठे बैठाए कुछ नहीं मिलता है। अगली बार राहुल को अमेठी में ही मुश्किल होगी। अगर अमेठी में चुनाव जीत जाएं तो बहुत बड़ी बात होगी। आप किसी कोरे कागज पर लिखवा लो….यदि वो अमेठी जीत जाएं तो जो कहोगे…। देखना राहुल गांधी अमेठी से अगला चुनाव ही नहीं लड़ेंगे।

गुजरात में कांग्रेस की जीत दिन में सपने देखने जैसी बात है। भाजपा को पटखनी देने की सोचने के बजाय राहुल अपने दल में लोकतंत्र बहाली पर ध्यान दें। कांग्रेस में वरिष्ठ नेता घुटन महसूस कर रहे हैं। गुजरात चुनाव के बाद नेताओं की घुटन सामने नजर आएगी। जिस व्यक्ति का जमीन से जुड़ाव नहीं, फीडबैक का तंत्र नहीं, वो कैसे राजनीति में सफल हो सकता है।

आपको क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं इससे राजनीति नहीं चलती है, बल्कि दोनों के बीच संतुलन बैठाना पड़ता है। कुछ लोग राहुल के जरिए देश पर शासन का सपना देख रहे हैं। मेरा कहना है कि देश के लिए सपना देखना तो दूर राहुल पहले कांग्रेस को दुरुस्त कर लें।

बिहार में अशोक चौधरी के मामले में उनके निर्णय का क्या हश्र हुआ सबके सामने है। कांग्रेस पार्टी के पास जीत का जज्बा नहीं है। उनका लोकतंत्र में भी भरोसा नहीं। उन्हें सबसे पहले लोकतंत्र में भरोसा जताना पड़ेगा। कांग्रेस पार्टी जिस दिन लोकतंत्र में विश्वास करेगी तो हो सकता है कि उसके 5 साल खराब जाएं। मगर इससे उसके 50 साल का भविष्य सुनहरा बनेगा। अब यह कांग्रेस को तय करना है कि लोकतंत्र की ताकत को समझ कर वह अपना भविष्य संवारे या वर्तमान के चक्कर में भविष्य भी अंधकार बनाए।

धूमल जी को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया गया, ऐलान के बाद कैसी स्थिति देख रहे हैं? यह ऐलान कितना जरूरी था? ऐसा नहीं लगता कि कहीं न कहीं पार्टी के अन्य नेताओं की उम्मीदों को झटका लगा है?

देखिए, हिमाचल प्रदेश एक बहुत ही छोटा राज्य है। छोटा राज्य होने की वजह से यहां कि जनता का अंदाज अलग है। लोग अपने नेता से सीधा संपर्क रखते हैं। और नेता से रिश्ते बनाने में विश्वास करते हैं। धूमल जी का कार्यकर्ताओं के साथ व्यक्तिगत लगाव है। कार्यकर्ता भी यहां नेता से सीधा संवाद एवं लगाव चाहता था, इसलिए मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में उनके नाम का ऐलान पार्टी आलाकमान ने किया है।

मेरा मानना है कि जब मोदी और शाह जैसे नेता होते हैं तो बिना रणनीति और योजना के कुछ भी नहीं होता है। इसलिए कहता हूं कि धूमल जी के नाम का ऐलान भी सोच-विचार के बाद हुआ है। धूमल जी के नाम के ऐलान के बाद से कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ा हुआ है। उनमें नई उमंग और उत्साह है। कार्यकर्ता ऊर्जावान होकर मुखर रूप से सामने आ रहा है। जनता के मूड में भी व्यापक बदलाव आया है।

अगले तीन दिनों में माहौल और बदलेगा, जब पीएम मोदी 7 रैलियां करेंगे। रही बात पार्टी के अन्य नेताओं की तो भाजपा टैलेंट से भरी पार्टी है। यहां सबके अनुभव का लाभ उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री का ऐलान इसलिए भी जरूरी हो गया था कि मीडिया ने ऊहापोह की स्थिति बना रखी थी।

आए दिन इधर-उधर की खबरें छप रही थीं। कुछ ऐसे भी थे जो इस दौड़ में नहीं थे, पर उनके नाम भी चल रहे थे। भाजपा नेतृत्व ने सूबे से नेतृत्व के मामले पर ऊहापोह की स्थिति को समाप्त किया है। और शुभदिन के रूप में जाने जाने वाले देवउठान एकादशी को चेहरे का ऐलान हुआ। नाम के ऐलान से सूबे में बड़ा संदेश गया है।

ऐसा नहीं लगता कि नेतृत्व के मामले में दोनों ही दलों ने युवाओं को ठगा है। 40 वर्ष के कम उम्र के आधे से ज्यादा मतदाताओं को बुजुर्ग नेतृत्व मिल रहा है?

मेरा मानना है कि कई जगह जोश नहीं, अनुभव काम आता है। प्रदेश पर 50 हजार करोड़ का कर्ज है। 3.5 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। ऐसे हालातों से निपटने के लिए अनुभव जरूरी है। धूमल जी पहले भी जनता के भरोसे पर खरा उतरे हैं, इसलिए सूबे की जनता में उनके प्रति विश्वास है।

यहां उम्र नहीं उनका अनुभव मायने रखता है। प्रदेश के जो हालात हैं, उसमें लोग उनकी ओर आशा भरी निगाह से देख रहे हैं। पिछले कार्यकाल में उन्होंने सूबे में सड़कों का विकास किया था। इस बार वे सूबे का संपूर्ण विकास करेंगे। कांग्रेस के पिछले 5 साल के कुशासन से जनता त्रस्त है। देवभूमि में माफिया राज है, इससे जनता को निजात दिलाने के लिए ही पार्टी नेतृत्व और पीएम मोदी ने अनुभवी नेता को आगे किया है।

यदि सूबे में भाजपा की सरकार बनी तो आपकी भूमिका क्या रहेगी, प्रदेश के नेतृत्व का कभी सपना संजोया है?

मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही हूं। बतौर सांसद अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करता रहूंगा। रही बात नेतृत्व की तो संगठन के दायित्वों को पूरा करने में विश्वास है। जब भी पार्टी ने जिस काम में लगाया है, उसका निर्वहन किया है। आगे भी ऐसा ही रहेगा। सूबे में अपने दल की सरकार आने से केंद्र की विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने में आसानी होगी।

मेरा सपना है, सूबे के बच्चों के बीच खेलों का विकास करना। डबल इंजन से प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होगी। मोदी जी ने 77 हजार करोड़ अतिरिक्त राशि 14 वित्त आयोग के जरिए दी है। एम्स, आईआईएम के अलावा नई रेल लाइनें भी बन रही हैं, जो कि हिमाचल ने इससे पहले नहीं देखा थी।

अनुराग जी, प्रदेश के चुनावी प्रचार में आप बखूबी जुटे हुए हैं। इस दफे प्रचार के मुद्दे क्या हैं? जनता भाजपा को क्यों वोट देगी?

इस दफे चुनाव में माफिया राज को खत्म करना, सबसे बड़ा मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी के बीते 5 वर्षों के कुशासन ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को पूरी तरह चौपट कर दिया है। यहां की कानून व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। देवभूमि अपराध भूमि में तब्दील हो गई है और ये सिर्फ कहने को नहीं है। हर सभा में जनता के बीच अपराध भूमि की हम गाथा रखते हैं। इस राज्य को विपरीत परिस्थिति से उठाकर उन बुलंदियों तक लेकर जाना है, जहां धूमल जी ने पहले छोड़ा था।

आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2007 से 12 के बीच प्रदेश को विकास के विभिन्न आयामों में 85 अवॉर्ड प्राप्त हुए थे, जबकि पिछले पांच वर्षों में 5 अवॉर्ड भी नहीं मिले हैं। इसके अलावा बेरोजगारी और नशामुक्ती भी एक बड़ा मुद्दा है। वायदा कर कांग्रेस ने बेरोजगारी भत्ता देने के नाम पर जनता का मजाक बनाया है। हम युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराने के साथ स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर जोर देंगे। गुणवत्तायुक्त शिक्षा, लैपटॉप, टैबलेट, 1 जीबी इंटरनेट डाटा और स्कूली बच्चों को बैग मुहैया कराने सरीखे कदम भी उठाएंगे।

प्रदेश के पानी, जंगल और पहाड़ का समुचित इस्तेमाल कर हम पर्यटन को नई दिशा में ले जाएंगे। साथ में देवीय स्थानों को भी पर्यटन से जोड़ा जाएगा। सेब उद्योग के लिए वेल्यू एडिशन करेंगे। ट्रांसर्पोटेशन खर्च को कम करने का प्रयास करने के साथ सेब उद्योग को ई-मंडी से जोड़ेंगे। युवाओं के विकास के लिए बहुत सारे स्टेडियम बना रहे हैं, ताकि युवा नशे के बजाय खेल की ओर रुख करें।

source-AU