चीनी राजदूत झाओहुई से राहुल गांधी की मुलाकात, पहले इन्कार फिर स्वीकार

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चीन के साथ जारी तनातनी में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का चीनी राजदूत लुओ झाओहुई से मिलने के बाद कई सवाल ने तूल पकड़ लिया है, क्योंकि पहले तो टीम राहुल ने इससे इन्कार किया और फिर बाद में स्वीकार कर लिया।

सोमवार को राहुल गांधी और चीनी राजदूत के बीच मुलाकात की खबरों पर पहले कांगे्रस के इन्कार और फिर इकरार की वजह से पूरे दिन हलचल रही। आखिरकार कांग्रेस ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह राजनयिकों से होने वाली सामान्य मुलाकात का हिस्सा था।

कांग्रेस ने कहा कि राहुल गांधी ने भारत में भूटान के राजदूत और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन से भी मुलाकात की थी। पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में कांग्रेस उपाध्यक्ष के नाते राहुल राजनयिकों से लेकर तमाम लोगों से मिलते-जुलते हैं।

पार्टी ने इसे मुद्दा बनाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जर्मनी में उसी समय चीनी राष्ट्रपति के होटल जाकर उनसे मुलाकात करते हैं, तो कोई उत्तेजना नहीं फैलाई जाती। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और संस्कृति मंत्री महेश शर्मा उसी समय 6 से 8 जुलाई के बीच चीन के दौरे पर होते हैं तो सवाल नहीं किया जाता। भाजपा के वरिष्ठ नेता राम माधव अपने दो शोधार्थियों का वीजा खारिज करने के बावजूद बीजिंग जाते हैं, तब भी इसे सामान्य रूप से लिया जाता है। हालांकि, इस मुलाकात में राहुल की चीनी राजदूत से क्या बात हुई, इसका ब्योरा मनीष तिवारी ने नहीं दिया। समझा जाता है कि डोकलाम सीमा पर जारी विवाद पर भी दोनों के बीच चर्चा हुई।

महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी लेना मेरा काम है। अगर सरकार चीनी राजदूत से मेरी मुलाकात को लेकर इतनी ही चिंतित है, तो उसे इस बात का जवाब भी देना चाहिए कि सीमा पर विवाद के रहते तीन मंत्री क्यों चीन की यात्रा पर गए?-राहुल गांधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष।

चीनी दूतावास ने अपनी साइट पर राहुल से आठ जुलाई को अपने राजदूत के मिलने की जानकारी दी। मगर कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने इस खबर को गलत करार दिया। सुरजेवाला के बयान के बाद चीनी दूतावास ने भी अपनी वेबसाइट से इस सूचना को हटा लिया। बाद में पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने मुलाकात की पुष्टि की, तो सुरजेवाला ने भी इसे मान लिया।

मुलाकात की खबर चलने पर कांग्रेस ने आक्रामक तेवर दिखाकर असहज स्थिति से निकलने का प्रयास किया। मोदी और चिनफिंग की मुलाकात पर भी सवाल दागे। लेकिन खुद कांग्रेस के नेता हैरान हैं कि सिर्फ औपचारिक मुलाकात थी तो छिपाने की कोशिश क्यों की गई?