कांग्रेस मुख्यालय पर मालिकाना हक का दावा दस्तावेजों के अनुसार सही, कांग्रेस को जारी होगा नोटिस

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कारोबारी मनीष अग्रवाल द्वारा माल एवेन्यू स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय की जमीन पर ठोके गए मालिकाना हक का दावा दस्तावेजों के अनुसार सही है। वर्ष 1986 में नगर निगम के दस्तावेजों में फर्जी तरीके से कारोबारी के पूर्वजों के नाम के आगे मोहसिना किदवई का नाम केयर ऑफ के रूप में जोड़ दिया गया। फिर वर्ष 2002 में कारोबारी के पूर्वजों के नाम पूरी तरह से गायब करके मोहसिना किदवई कांग्रेस कमेटी का नाम अंकित कर दिया गया है। यह फर्जीवाड़ा नगर निगम के तत्कालीन कर अधीक्षक द्वारा बिना किसी साक्ष्य, दस्तावेजों व नोटिंग के कर दिया गया।

यह राजफाश नगर निगम की नाम परिवर्तन की पुरानी मूल पत्रावली में हुआ है। जोनल अधिकारी अशोक सिंह द्वारा रिकार्ड अधीक्षक से वर्ष 1986 के मांगी गई पुरानी मूल पत्रावली के मुताबिक कारोबारी के पूर्वजों के नाम के आगे बिना किसी दस्तावेज और साक्ष्य के मोहसिना किदवई अध्यक्ष उप्र कांग्रेस कमेटी का नाम दर्ज किया गया था।

रिकार्ड अधीक्षक वीके जायसवाल ने जोनल अधिकारी को मूल पत्रावली के साथ भेजी नोटिंग में लिखा है कि वर्ष 1986 में रामस्वरूप अग्रवाल एवं पद्मावती अग्रवाल के नाम के आगे केयर ऑफ के रूप में मोहसिना किदवई अध्यक्ष उप्र कांग्रेस कमेटी का नाम जोड़ दिया गया, जबकि पत्रावली में नाम जोड़े जाने का कारण, साक्ष्य या अन्य नोटिंग में नाम परिवर्तन का कोई उल्लेख नहीं है। नाम परिवर्तन के कोई साक्ष्य भी पत्रावली में नहीं हैं। तत्कालीन कर निरीक्षक ने कारोबारी के नाम के आगे कांग्रेस का नाम जोड़ा था, जिसके साक्ष्य नहीं हैं।

नगर निगम के जोनल अधिकारी अशोक सिंह ने बताया कि मूल पत्रावली आने के बाद कांग्रेस से जवाब देने के लिए नोटिस जारी की जाएगी। फिलहाल कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

गोमतीनगर निवासी मनीष अग्रवाल ने 15 माल एवेन्यू को अपने पूर्वजों का बताते हुए नाम परिवर्तन का आवेदन किया था। आवेदन में उन्होंने लिखा था कि उनके पूर्वाधिकारी स्वर्गीय राम स्वरूप और पुरुषोत्तम ने केंद्र सरकार के पुनर्वास मंत्रालय से 29 अप्रैल, 1961 को नीलामी में एक लाख 75 हजार रुपये में माल एवेन्यू की यह संपत्ति खरीदी थी, जो नगर निगम में 6/10 माल एवेन्यू में दर्ज है। मनीष ने पुनर्वास मंत्रालय की तरफ से नीलामी की प्रति, कांग्रेस मुख्यालय का मानचित्र और इससे जुड़े अन्य अभिलेख भी दिए हैं।

अभिलेखों में वर्ष 1970 से 1986 तक रामस्वरूप अग्रवाल और पुरुषोत्तम दास (दिवंगत) की पत्नी पद्मावती के नाम अंकित थी लेकिन, 1986 में अभिलेख में यह संपत्ति रामस्वरूप अग्रवाल और पद्मावती केयर ऑफ मोहसिना किदवई (तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष) के नाम दर्ज हो गई थी और जो अभी तक मोहसिना किदवई के नाम दर्ज है। अब दस्तावेजों में फर्जीवाड़े की जानकारी होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

source-DJ