प्रधानमंत्री आवास व भारत के मुख्य न्यायाधीश के आवास पर बंदरों का कब्ज़ा

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आज कल प्रधानमंत्री आवास व भारत के मुख्य न्यायाधीश के आवास पर बंदरों का कब्ज़ा हो गया है इसके अलावा, कई केंद्रीय मंत्रियों एवं नेताओं के आवास पर बंदर जमकर उत्पात मचाते हैं। एनडीएमसी के अधिकारियों का कहना है कि लुटियंस दिल्ली में 50 से ज्यादा जगहों पर बंदरों ने उत्पात मचा रखा है। एनडीएमसी की ओर से इन्हें पकड़ने के लाख जतन किए जा रहे हैं, लेकिन नतीजा सिफर है। लिहाजा, एनडीएमसी इन्हें पकड़ने के लिए अब गैर सरकारी संगठनों की मदद लेगी। इस बाबत टेंडर जारी कर दिया गया है|

एनडीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि बंदरों के आतंक वाली जगहों की सूची तैयार की गई है। इसमें 50 स्थान शामिल किए गए हैं। इस सूची में 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पहले नंबर पर है। यहां विगत वर्षो में बंदरों की संख्या बढ़ती जा रही है। सूची में कृष्ण मेनन मार्ग स्थित भारत के मुख्य न्यायाधीश का आवास कोठी संख्या 5 दूसरे नंबर पर है। इस सूची में भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 6ए कृष्ण मेनन मार्ग स्थित आवास भी शामिल है। यही नहीं, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन व जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता शरद यादव के आवास पर भी बंदरों का आतंक है। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के 10 जनपथ मार्ग स्थित आवास पर भी बंदर उधम मचाते हैं। साउथ ब्लॉक, डलहौजी रोड, सेना भवन, 3 मूर्ति लेन, उद्योग भवन, नार्थ ब्लॉक, मंदिर मार्ग, राजा बाजार, रफी मार्ग, पंडारा रोड, सरोजनी नगर, लक्ष्मी बाई नगर, निर्माण भवन, कनॉट प्लेस, कृषि भवन व न्यू मोती बाग भी बंदरों के आतंक से अछूते नहीं हैं|

गैर सरकारी संगठन की मदद एनडीएमसी अब बंदरों को पकड़ने के लिए गैर सरकारी संगठन की मदद लेगी। एनडीएमसी के अधिकारी ने बताया कि दो साल के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है। संगठन को प्रतिदिन 10 बंदर पकड़कर असोला भाटी स्थित वन्यजीव अभयारण्य में भेजने होंगे। इसके अलावा इन 50 जगहों पर कर्मचारियों की नियुक्ति करनी होगी। कर्मचारी कुशल होने चाहिए ताकि बंदरों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। पहले भी हो चुकी हैं कोशिशें बंदरों के उत्पात पर लगाम लगाने के लिए एनडीएमसी कई बार कोशिश कर चुकी है। इसके पहले लंगूर की तैनाती की गई थी। इस पर कई संगठनों द्वारा एतराज जताए जाने के बाद लंगूरमैन की तैनाती की गई थी, लेकिन इससे कोई खास सफलता नहीं मिली। इसके बाद सिमियम टेप से बंदरों को करंट देकर भगाने की योजना बनी, लेकिन गुजरात की एक एनजीओ द्वारा कानूनी नोटिस भेजने के चलते यह योजना अधर में लटक गई|