प्रशांत किशोर ने बताया यूपी में क्यों फेल हो गई थी राहुल-अखिलेश की दोस्ती

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भाजपा, जेडीयू-आरजेडी और कांग्रेस के लिए चुनावी अभियानों की कमान संभाल चुके प्रशांत किशोर अब जेडीयू में नंबर दो की हैसियत पर आ चुके हैं। जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू का उपाध्यक्ष बनाया है और उन्हें फिलहाल युवाओं को जोड़ने की जिम्मेदारी दी है। बहरहाल बात करें असल मुद्दे की तो प्रशांत किशोर ने उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस की रणनीति पूरी तरह फेल हो जाने और राहुल-अखिलेश की दोस्ती के नाकाम हो जाने की वजहों का खुलासा किया है।

एक बड़े मीडिया हाउस के कार्यक्रम में जेडीयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने कहा कि जब वह कांग्रेस के लिए कैंपेन की रणनीति बना रहे थे तभी ऐसे हालात बन गए कि यूपी चुनाव एक ऐसी शादी की तरह हो गया था, जहां दूल्हा और दुल्हन भाग गए और शादी की सारी जिम्मेदारी आयोजक को ही उठानी पड़ी। प्रशांत किशोर ने बताया कि हमने कैंपेन की शुरुआत 27 साल, यूपी बेहाल के नारे के साथ की, जिससे साफ है कि तब गठबंधन का कोई आइडिया था ही नहीं। इसी बीच सितंबर 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक हो गई, जिसके बाद कांग्रेस के बड़े नेताओं में इस बात पर सहमति बनी कि इन हालातों में अकेले चुनाव लड़ना अच्छा निर्णय नहीं होगा।

इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के गठजोड़ के बाद यूपी में चुनाव के हालात बदल गए। कांग्रेस के नारे आनन-फानन में बदले गए। दीवारों पर लिखे गए नारे ’27 साल यूपी बेहाल’ को पुतवा दिया गया और नए नारे बनाए गए. जिनमें ‘यूपी को ये साथ पसंद है’ जैसे नए स्लोगन चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किये गए।

जो नतीजे आए वो सबके सामने हैं। सपा-कांग्रेस का गठबंधन जरा भी काम नहीं आया और बीजेपी ने क्लीन स्वीप कर दिया। प्रशांत किशोर का कहना था कि कांग्रेस के लिए जो प्लान बनाया गया था, अगर वह पूरी तरह से लागू होता तो कांग्रेस जरूर वापसी करती। प्रशांत ने राहुल गांधी के साथ बहुत करीब रह कर काम किया और उनके चुनावी भविष्य के बारे में प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्हें अभी टाइम देना पड़ेगा।