गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, महिलाओं की स्थिति और बेरोजगारी अगले पांच वर्षो में हमें दूर करना होगा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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भारत छोड़ो आंदोलन की तर्ज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबी, अशिक्षा, भुखमरी, कुपोषण और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं के खात्मे का परोक्ष वादा भी किया और इस काम में सहयोग भी मांगा। उन्होंने कहा कि जैसे तब महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था वैसे ही हमें अब ‘करेंगे और करके रहेंगे’ के विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

वक्त कुछ ऐसा था कि चाहकर भी राजनीति करना किसी पार्टी के लिए मुश्किल था। लेकिन, राजनीतिक दलों से राजनीति पूरी तरह छूटती भी कहां है? यही कारण है कि भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर संसद में विशेष चर्चा के दौरान भी कांग्रेस और भाजपा ने एक-दूसरे पर परोक्ष हमले किए। एक-दूसरे को इतिहास की याद दिलाई गई। कांग्रेस इससे आहत दिखी कि प्रधानमंत्री के भाषण में कई सेनानियों का जिक्र हुआ, लेकिन जवाहरलाल नेहरू का नहीं। दूसरी तरफ, खुद कांग्रेस की ओर से आरएसएस का नाम लिए बगैर उसकी भूमिका का जिक्र हुआ। कुछ विपक्षी दलों को यह नागवार गुजरा कि कांग्रेस स्वतंत्रता संग्राम का सेहरा अकेले अपने माथे कैसे बांध रही है, जबकि उस वक्त यह अलग-अलग विचारधारा वाले नेताओं का कुनबा थी। हालांकि, सबने एकस्वर से 2022 तक सद्भावना से परिपूर्ण और भ्रष्टाचार मुक्त नया भारत बनाने का संकल्प लिया। इस सिलसिले में दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव भी पारित किया।

भ्रष्टाचार, गरीबी, कुपोषण जैसी समस्याएं खत्म करने के लिए मांगा समर्थन-जीएसटी का उदाहरण देकर बताया कि किस तरह सभी दलों ने मिलकर इसे लागू किया।

बुधवार को भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में संसद के दोनों सदनों में विशेष चर्चा हुई। देश के सामने कश्मीर से लेकर चीन के सीमा विवाद जैसे विवाद सामने हैं। तब पूरी दुनिया को एकस्वर में बताया गया कि राष्ट्रहित के मुद्दे पर भारत एक है। मोदी पूरी परिचर्चा के दौरान लोकसभा में उपस्थित रहे। मोदी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ इसकी वजह से देश उतनी प्रगति नहीं कर सका, जितनी कर सकता था। भ्रष्टाचार ने देश की राजनीति को अंदर से खोखला कर दिया है। इसके अलावा गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, महिलाओं की स्थिति और बेरोजगारी का उन्होंने खास तौर पर जिक्र किया और कहा कि इन्हें अगले पांच वर्षो में हमें दूर करना होगा। उन्होंने वर्ष 1942 के वैश्विक परिवेश की तुलना मौजूदा हालात से की।

मोदी ने कहा कि जैसे भारत की आजादी ने दुनिया के अन्य गुलाम देशों के आजाद होने का रास्ता साफ किया, वैसे ही आज तमाम देश भारत की तरफ देख रहे हैं। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद लक्ष्य के लिए एकजुटता के सिलसिले में उन्होंने जीएसटी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह से सभी दलों ने मिलकर इसे लागू करने का काम किया। अपने भाषण में मोदी ने महात्मा गांधी के साथ ही सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, लाल बहादुर शास्त्री, जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का नाम लिया।

source-DJ