एक सप्ताह में कई करोड़ काला धन पूर्वांचल में ही पकड़ा गया, कैसे बचेगा यूपी इलेक्शन कला धन से

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सर्वे में ये बात सामने आयी थी कि यूपी चुनाव पर नोटबंदी का असर नहीं पड़ेगा। वजह राजनैतिक पार्टियों और प्रत्याशियों ने चुनाव के लिये पहले से ही इंतजाम कर लिया है। सर्वे की यह बात अब सच होती दिख रही है। चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही यूपी में बड़ी तादाद में कैश पकड़ा जाने लगा है। सिर्फ पूर्वांचल की बात करें तो पिछले एक सप्ताह में ही अब तक 3 करोड़ 51 लाख 22 हजार रुपये पुलिस ने जांच के दौरान पकड़े हैं। इनमें विदेशी मुद्रा भी शामिल हैं। यही नहीं पुलिस ने तकरीबन 79 लाख रुपये मुल्य के सोने के जेवरात भी जांच के दौरान पकड़े हैं। बड़ी बात यह कि पकड़े गए रुपयों में दो हजार रुपये के नए नोट बड़ी तादाद में हैं, इसके अलावा बाकी कैश 100-100 की नोटों के रूप में हैं। इनमें 10 रुपये के सिक्के भी बड़ी मात्रा में बरामद किये गए हैं।

दरअसल आठ नवंबर 2016 की आधी रात से पीएम नरेन्द्र मोदी ने 1000 व 500 रुपये के नोटों को चलन से बाहर कर दिया। इसके पीछे यह तर्क दिया गया था कि यह काले धन पर स्ट्राइक के लिये किया गया है। इसका असर तो पड़ा, लेकिन राजनीति में इस्तेमाल होने वाले काले धन पर लगाम लगती नहीं दिख रही है। इसका सबूत है पिछले दिनों पुलिस की जांच में पकड़ी गए कैश। ये कैश करोड़ों रुपये के रूप में पकड़े गए। चुनाव आयोग के कड़े निर्देश के बाद हालांकि पुलिस ने पूरे यूपी में रुपयों की बरामदगी के लिये जांच शुरू की है और कैश पकड़े भी जा रहे हैं, पर जिस तरह से लगातार कैश बरामदगी हो रही है, यह इस बात की ओर इशारा है कि चुनाव के लिये बड़ी मात्रा में काला धन बाजार में आ चुका है। इनमें से कुछ तो पकड़े जा रहे हैं, बड़ी मात्रा ऐसे कैश की भी हो सकती है जो पकड़े नहीं गए हैं।

गुरुवार को ही पुलिस ने देवरिया के रामपुर कारखाना खास थानाक्षेत्र के हेत्तिमपुर टोल प्लाजा पर चेकिं के दौरान एक करोड़ 10 लाख रुपये बरामद किये। इसी तरह वाराणसी में पुलिस ने दो थानाक्षेत्रों से चेकिंग के दौरान 90 लाख रुपये और 79 लाख रुपये के जेवरात बरामद किये। इसी तरह प्रतापगढ़ के कुण्डा से भी गुरुवार की रात एक कार से पांच लाख 20 हजार रुपये बरामद किये गए। पुलिस का कहना है कि वह किसी भी तरह से यूपी चुनाव में काले धन के इस्तमाल को रोकने की कोशिश में लगी हुई है।
राजनीतिक दलों की सभाओं और रैलियों पर नोटबंदी का असर नहीं
नोटबंदी के बाद जहां यह कहा जा रहा था कि यूपी के चुनाव में राजनीतिक दलों की सभाएं और चुनावी रैलियां प्रभावित होंगी। पर यह दावा गलत साबित हुआ। यहां तक कि पिछले चुनावों से बड़ी रैलियां रानीतिक दलों ने नोटबंदी के बाद की हैं। प्रत्याशियों की ओर से लगातार इस तरह खर्च किये जा रहे हैं जैसे उन पर नोटबंदी का कोई असर नहीं। हालांकि जो सर्वे आया था उसमें यह साफ कहा गया था कि चुनाव के लिये राजतनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों ने अपने लिये अलग इंतजाम कर लिया था। कुल मिलाकर नोटबंदी के बाद यूपी चुनाव की स्वच्छता का जो सपना देखा गया था वह टूटता नजर आ रहा है। अब देखना है कि इलेक्शन कमीशन की कार्रवाई से चुनाव में इस्तेमाल होने वाले काले धन का कितना हिस्सा पकड़ा जाता है।
पिछले एक सप्ताह मे पूर्वांचल में पकड़ा गया कैश
देवरिया- एक करोड़ 10 लाख रुपये
वाराणसी- एक करोड़ रुपये
कुशीनगर- 14 लाख 94 हजार रुपये
आजमगढ़- 87 लाख 21 हजार रुपये
प्रतापगढ़- 20 लाख 85 हजार रुपये
गोरखपुर- दो लाख 63 हजार रुपये
इलाहाबाद- तीन लाख 74 हजार रुपये
बस्ती- सात लाख 40 हजार रुपये