इंफॉर्मेशन टेक्नॉलोजी+इंडियन टेलेंट=इंडिया टूमॉरो, टेक्नॉलोजी से देश की आर्थिक सूरत बदली जा सकती है

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दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से जुड़े नए केस मैनेजमेंट सिस्टम का अनावरण किया। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिन जेएस खेहर भी मौजूद थे। उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट से जुड़े इस नए फीचर से कानून व्यवस्था और न्यायपालिका को डिजिटल तौर पर सशक्त किया जाएगा।

पीएम ने कहा कि स्पेस टेक्नोलॉजी में भारत नई क्रांति लाया। टेक्सी से कम किराय में पहली ही बार में मंगल तक पहुंचने में मिली सफलता है। इस प्रोग्राम का खर्च हॉलीवुड की फिल्म के बजट से भी कम बताया। पीएम ने कहा कि जिस देश में 9 और 12 गैस के सिलेंडर देश की लोकसभा का भविष्य तय करते हैं, उस देश में 1.2 लाख परिवारों ने गैस सब्सिडी छोड़ी। उन्होंने कहा कि देश के हजारों डॉक्टर हर महीने 9 तारीख को गरीब गर्भवती महिलाओँ का मुफ्त इलाज करते हैं।

उन्होंने वकीलों से गरीबों की मदद करने की अपील की। साथ ही उन्होंने युवाओं से कहा कि वो लोगों को नई तकनीक से जोड़ें। पीएम ने कहा कि नए दौर ने नई तकनीक के साथ ही देश आगे बढ़ सकता है। तकनीक से देश की आर्थिक सूरत बदली जा सकती है।

पीएम ने कहा ”इंफॉर्मेशन टेक्नॉलोजी+इंडियन टेलेंट=इंडिया टूमॉरो”

मोदी ने कहा, “क्वांटम के रूप में परिणाम कैसा आता है वह अलग बात है, लेकिन यह सेंस ऑफ रिस्पॉस्बिलिटी का बल देता है और सामान्य नागरिक के मन में भी विश्वास पैदा होता है। न्यू इंडिया के लिए यह विश्वास जरूरी है। और इसके लिए मैं आपका हृदय से आभारी हूं। आज 10 मई का एक और महत्व है। 1857 का स्वतंत्रता संग्राम, देश की आजादी के संघर्ष का प्रारंभ आज ही के दिन शुरू हुआ था। आज आधुनिकता की एक ओर कदम वह भी न्याय व्यवस्था की तरफ से हो रहा है।”

मोदी ने कहा “सरकार का टेक्नोलॉजी के बारे में जो अनुभव है, सरकार या सरकार से जुड़ीं व्यवस्था में हमारा अनुभव टेक्नोलॉजी के मामले में सीमित रहा। हार्डवेयर को ही हमने अहम मान लिया। माइंडसेट ही प्रॉब्लम है। भगवान बुद्ध कहते थे मन बदले, मंतव्य बदले, तभी बदलाव की शुरुआत होती है।कितना भी महंगा मोबाइल ले आए लेकिन कॉन्टेक्ट लिस्ट की डायरी रहती है। लोगों को मोबाइल में ग्रीन और रेड बटन से ज्यादा मालूम कुछ नहीं होता है। हम लोगों को एसएमएस करते हैं फिर फोन करते हैं, एसएमएस मिला।”

मोदी ने कहा, “जब तक अखबार हाथ में लेकर नहीं पढ़ते, तब तक संतोष नहीं होता। आज के बच्चे मोबाइल पर अखबार पढ़ लेते हैं।जो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं करता, वह नई व्यवस्था में आईसोलेट हो जाता है। जेनरेशन गैप की प्रॉब्लम है। इसे कोपअप करना होगा। मेरे हिसाब से ई-गवर्नेंस को जीवन के हर क्षेत्र में कैसे लाएं? एक ए-4 साइज का कागज बनाने में 10 लीटर पानी लगता है। अगर मैं पेपरलेस की ओर जाने वाला हूं तो मैं कितने जंगल बचाऊंगा, कितनी बिजली बचाऊंगा। कितना एनवायरमेंट बचाऊंगा। लेकिन हम सोचते हैं कि यह मेरा काम नहीं है। जहां हम काम करते हैं वहां सोचते हैं हमारी कोई गलतियां नहीं होतीं हमारी कोई कमियां नहीं होतीं। जब मैंने कुछ डिपार्टमेंट में समस्याएं पूछीं तो लोगों ने कहा सब ठीक है। लेकिन गहराई से पता किया तो करीब 400 छोटी प्रॉब्लम पता चलीं, जिन्हें थोड़े से प्रयास से ठीक किया जा सकता था।”