स्टारडम छोड़ ओशो के मोह में संन्यासी बने थे विनोद खन्ना, PM मोदी और CM योगी ने जताया दुख

109
SHARE

भारतीय जनता पार्टी के नेता तथा फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना का आज लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। विनोद खन्ना ने बॉलीवुड में वर्षों तक राज किया और 1998 के लोकसभा चुनावों के दौरान वह भाजपा से जुड़े और अपना पहला चुनाव गुरदासपुर से लड़कर सांसद बने। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। विनोद खन्ना 70 वर्ष के थे। उन्होंने 141 फिल्मों में काम किया था।

6 अक्टूबर, 1946 को पेशावर (पाकिस्तान) में जन्मे विनोद खन्ना ने “मन का मीत” (1968) से फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। कई सुपरहिट फिल्में देने के बाद वे ओशो से जुड़े। उनसे इस कदर इंस्पायर हुए कि उनके आश्रम में 5 साल गुजार दिए। वहां उन्होंने माली का काम किया। फिल्मों में वापसी के 10 साल बाद उन्होंने पॉलिटिक्स में एंट्री ली।

ओशो से जुड़ने के बाद उन्होंने कई जोड़ी सूट, कपड़े, जूते और दूसरे लग्जरी सामान लोगों में बांट दिए थे। वे पहले गेरुआ, फिर आश्रम का मरून चोगा पहनने लगे। दिसंबर 1975 में विनोद ने अचानक संन्यासी बनने का फैसला किया। ओशो यूएस के ओरेगन शिफ्ट हो गए थे। विनोद भी वहीं चले गए। 1982 के बाद ओशो के साथ उनके रजनीशपुरम आश्रम में खन्ना ने करीब 5 साल गुजारे।

प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने ट्विटर पर लिखा है विनोद खन्ना एक लोकप्रिय अभिनेता, समर्पित नेता और एक अद्भुत इंसान के रूप में हमेशा याद रहेगे। उसके निधन से दुख है|