मोर सेक्स नहीं करता, इसलिए राष्ट्रीय पक्षी: राजस्थान हाईकोर्ट के जज

242
SHARE

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव देने वाले राजस्थान हाईकोर्ट के जज जस्टिस महेश चंद शर्मा ने कहा है कि मोर सेक्स नहीं करता है, वह ब्रह्मचारी रहता है, इसलिए राष्ट्रीय पक्षी है।

बुधवार को जस्टिस शर्मा की बेंच ने हिंगोनिया गोशाला में गायों की मौतों के 7 साल पुराने केस की सुनवाई की, इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से कोऑर्डिनेट कर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने की कोशिश करे। बेंच ने यह भी कहा कि गोहत्या की सजा बढ़ाकर उम्रकैद की जाए, अभी यह 3 साल है।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक कोर्ट से बाहर जस्टिस शर्मा ने रिपोर्टर्स से बातचीत में कहा, “मोर राष्ट्रीय पक्षी क्यों है? वह ब्रह्मचारी रहता है। इसके आंसुओं से ही मोरनी गर्भवती होती है। मोर पंख भगवान कृष्ण ने इसलिए ही लगाया, क्योंकि वह ब्रह्मचारी है। मंदिरों में भी इसीलिए मोर पंख लगाया जाता है, संत भी इसे रखते हैं। ठीक इसी तरह गाय के अंदर भी इतने गुण हैं कि उसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए।” बता दें कि जस्टिस शर्मा बुधवार को रिटायर हो गए।

जस्टिस शर्मा ने कहा कि वह शिवभक्त हैं, यह फैसला उनकी आत्मा की आवाज है। उन्होंने अपने फैसले में गाय के कई फायदे भी गिनाए। उन्होंने कहा, “मान्यता है कि गाय में 33 करोड़ देवी-देवता रहते हैं। गाय समुद्र मंथन में लक्ष्मी के साथ निकली थी। सिर्फ गाय सांस में ऑक्सीजन लेती है और छोड़ती भी ऑक्सीजन ही है। यह खुद में अस्पताल है। गोबर सालाना 45 सौ लीटर बायोगैस पैदा करता है, हर गोवंश का गोबर लगाएं तो 14 करोड़ पेड़ बचेंगे। गोमूत्र से लिवर, दिल और दिमाग स्वस्थ रहते हैं। गोमूत्र पीने से पाप धुल जाते हैं। दीवारों पर गोबर का लेप रेडिएशन से बचाता है। गाय का दूध पीने से कैंसर नहीं होता। गाय के रंभाने से हवा में मौजूद रोगाणु खत्म होते हैं।”

जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने 139 पेज के फैसले में कहा कि गायों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “नेपाल हिंदू राष्ट्र है। उसने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया है। भारत एग्रीकल्चर और एनिमल हसबैंडरी पर डिपेंड है। कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 48 और 51ए के तहत उम्मीद की जाती है कि सरकार गाय को कानूनी दर्जा दिलवाएगी।”

राजस्थान हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी और एडवोकेट जनरल को गाय का कानूनी संरक्षक बनाया है। हाईकोर्ट का फैसला ऐसे वक्त आया है, जब केंद्र ने मारने के मकसद से मवेशियों को खरीदने और बेचने पर बैन लगा दिया है। केंद्र के इस फैसले का केरल और कर्नाटक में विरोध हो रहा है।

2016 में राजस्थान सरकार की ओर से चलाई जाने वाली हिंगोनिया गोशाला में सैकड़ों गायों की मौतों का मामला सामने आया था। जिसके बाद सरकार ने इस मामले में रिपोर्ट मांगी थी और गोशाला के हालात सुधारने की बात कही थी। रिपोर्ट में सामने आया था कि गायों की मौत गोशाला के रख-रखाव में खामियों की वजह से हुई है।