पटना हाईकोर्ट ने सेनारी हत्‍याकांड में 10 को फांसी, 3 को उम्रकैद की सजा सुनाई

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पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को जहानाबाद के बहुचचर्चित सेनारी हत्‍याकांड में सजा का ऐलान कर दिया। अदालत ने इस हत्‍याकांड के आरोपियों में से 10 को फांसी की सजा सुनाई है वहीं 3 अन्‍य को उम्रकैद की सजा दी है। इससे पहले हाईकोर्ट ने अक्‍टूबर में सुनवाई करते हुए जनसंहार के 23 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था वहीं 15 को दोषी ठहराया था।

17 साल पहले 18 मार्च 1999 की देर शाम करीब साढ़े सात बजे प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के हथियारबंद दस्ते ने सेनारी गांव में एक जाति विशेष के 34 लोगों की गला रेतकर हत्या कर दी थी।

सेनारी में उस शाम नक्सली जाति विशेष के लोगों को घरों से उत्तर सामुदायिक भवन के पास बधार में ले गए थे। वहां उनकी गर्दन रेतकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में चिंता देवी के बयान पर गांव के 14 लोगों सहित कुल 70 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। चिंता देवी के पति अवध किशोर शर्मा व उनके बेटे मधुकर की भी वारदात में हत्या कर दी गई थी।

यह मुकदमा लंबे समय तक चला। इस दौरान वादी चिंता देवी की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। चार आरोपियों की भी मौत हो चुकी है। 34 का ट्रायल पूरा हो चुका है, जिनकी गिरफ्तारी हो चुकी थी। ये सभी जेल में हैं। इस हत्याकांड के 66 गवाहों में से 32 ने सुनवाई के दौरान गवाही दी।