संसद हमले के 15 साल

10
SHARE

13 दिसंबर 2001 को लोकतंत्र का मंदिर गोलियों और ग्रनेड के धमाकों की आवाज से दहल गया था। दिल्ली की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जगह पर हुए आतंकी हमले से पूरा देश सकते में आ गया। आज उस घटना को पूरे 15 साल हो गए हैं|

लेकिन उसके जख्म आज भी कई लोगों की जिंदगी में हैं। इस हमले में एक नागरिक समेत 9 लोगों की मौत हो गई थी। 13 दिसबंर 2001 को विपक्ष (कांग्रेस) के हंगामें की वजह से दोनों सदनों की कार्यवाही को 40 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया था। तभी 11 बजकर 40 मिनट पर एक कार संसद भवन के परिसर में घुसती है और फिर शुरु होता आतंक का खूनी खेल। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार थी। सदन की कार्यवाही स्‍थगित होने के बाद प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष (सोनिया गांधी ) तो सदन से चले गये थे, लेकिन तत्‍कालीन गृहमंत्री लालकृष्‍ण आडवाणी समेत सैकड़ो सांसद सदन के अंदर ही मौजूद थे|