पाक को हुआ गलती का एहसास, माना आतंक फैला रहा सईद

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पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने लाहौर में न्यायिक समीक्षा बोर्ड के सामने पेश सईद के बारे में अपनी यह दलील रखी। लौहार कोर्ट में पेशी के दौरान सईद ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि पाकिस्तानी सरकार ने उसे कश्मीर के लोगों के लिए आवाज उठाने से रोकने के लिए नजरबंद किया है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने सईद के इस दावे को खारिज करते हुए साफ किया कि वे और उसके साथी जिहाद के नाम पर आतंकवाद फैला रहे हैं। इसी वजह से उन्हें पकड़ा गया है।

न्यायिक बोर्ड सईद की गिरफ्तारी की समीक्षा कर रहा। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एजाज अफजल खान, लाहौर हाईकोर्ट की जस्टिस आएशा ए मलिक, बलूचिस्तान हाईकोर्ट के जस्टिस जमाल खान की सदस्यता वाले बोर्ड ने अब पाकिस्तान सरकार को आदेश दिया है कि सईद और उनके साथियों की गिरफ्तारी के संबंध में पूरा रिकॉर्ड अगली सुनवाई पर पेश करें। न्यायिक बोर्ड ने इस मामले में पाकिस्तान के एटर्नी जनरल को व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश होने का भी निर्देश दिया है।

हाफिज सईद और उसके चार साथियों की लाहौर हाईकोर्ट में पेशी के दौरान कोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में उसके समर्थक भी मौजूद थे। सईद ने अपनी नजरबंदी का विरोध किया। उसने जजों से कहा है कि उसे कश्मीर के लोगों की आजादी के लिए आवाज उठाने से रोका जा रहा है। सईद ने कहा कि हम और हमारा संगठन कश्मीर की आजादी की लड़ाई लड़ रहे। पाकिस्तान सरकार इसमें बाधा उत्पन्न कर रही। सईद ने दावा किया कि यूनाइटेड नेशंस और भारत को खुश करने के लिए पाकिस्तानी सरकार गैरकानूनी ढंग से उन्हें नजरबंद कर हुई है।

उधर, पिछले गुरुवार को न्यायिक बोर्ड के समक्ष पाकिस्तान के केंद्रीय आंतरिक मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा था कि यूनाइटेड नेशंस और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के दबाव में पाकिस्तान सरकार जमात-उद-दावा के खिलाफ कार्रवाई कर रही। इसके बाद बोर्ड ने सरकार से पूछा था कि 90 दिन की हिरासत की अवधि बढ़ाने के पूर्व सईद और उसके साथियों को समीक्षा बोर्ड के समक्ष पेश क्यों नहीं किया गया। 30 अप्रैल को पाकिस्तान सरकार ने उनकी हिरासत की अवधि बढ़ा दी थी। उनके खिलाफ आतंकवादी निरोधी धाराएं लगाई गई हैं। उसके पूर्व पंजाब (पाकिस्तान वाले) की सरकार ने 30 जनवरी को हाफिज सईद समेत पांच लोगों को उनके घरों में हाउस अरेस्ट कर दिया था। दरअसल पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार पर अमेरिका का दबाव था। अमेरिका ने सईद और उसके संगठन के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की स्थिति में प्रतिबंध की धमकी दी थी। इसी धमकी के बाद सईद को नजरबंद किया गया। जमात-उद-दावा को अमेरिका ने 2014 में आतंकवादी संगठन करार दिया था।

source-DJ