पाक फाइटर जेट्स ने सियाचिन के पास उड़ान भरी, कल भारतीय सेना ने तबाह की थी पाक की 10 चौकियां

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पाकिस्तानी एयरफोर्स के फाइटर जेट्स ने बुधवार को सियाचिन ग्लेशियर के पास उड़ान भरी। इनमें से एक प्लेन को खुद पाक के एयरफोर्स चीफ सोहैल अमन उड़ा रहे थे। बुधवार को पाक मीडिया की रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया। हालांकि, भारत ने पाक के दावे को खारिज कर दिया है। कहा जा रहा है कि पाक ने सियाचिन ग्लेशियर में अपने सभी फाॅरवर्ड ऑपरेटिंग बेस एक्टिव कर दिए हैं। यहीं पर प्रैक्टिस के लिए पाक एयरफोर्स के मिराज जेट्स को भेजा गया था। पाक के एयर चीफ मार्शल ने वहां एक एयरबेस पर सैनिकों से बातचीत में यह धमकी भी दी कि अगर पाक पर कोई कार्रवाई होती है तो हमारे जवाब को भारत की कई पीढ़ियां याद रखेंगी। Q&A में समझें मामला…

1) पाक के जेट्स कहां नजर आए?
– समा टीवी के मुताबिक, पाकिस्तान के जेट्स ने स्कर्दू से उड़ान भरी। यहां के कादरी एयरबेस पर पाक के चीफ ऑफ एयर स्टाफ सोहैल अमन आए थे। उनके साथ पाक एयरफोर्स के बाकी आला अफसर भी मौजूद थे।
– पाक एयरफोर्स के चीफ ने ही हरी झंडी दिखाकर मिराज फाइटर जेट्स को प्रैक्टिस फ्लाइट के लिए रवाना किया। इन जेट्स ने हायर और लोअर एल्टीट्यूड पर उड़ान भरी। एक जेट को खुद एयरफोर्स चीफ ने उड़ाया।

2) पाक ने क्या दी धमकी?
– जियो न्यूज के मुताबिक, पाक एयर चीफ ने कादरी एयरबेस पर मौज्ूद सैनिकों से कहा कि भारत के बयानों से पाकिस्तान को फिक्र नहीं करनी चाहिए। अगर भारत ने कोई कार्रवाई या हमला किया तो हमारा जवाब ऐसा होगा कि भारत की कई पीढ़ियां उसे याद रखेंगी।

3) आखिर वहां क्यों पहुंचे थे पाक के एयर चीफ
– पाक मीडिया का दावा है कि सियाचिन ग्लेशियर से सटे सभी फॉरवर्ड ऑपरेशनल बेस एक्टिव कर दिए गए हैं। इसी के चलते एयरचीफ का वहां दौरा हुआ।

4) भारत ने क्या कहा?
– इंडियन एयरफोर्स ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि पाक के फाइटर जेट्स ने सियाचिन में भारत के आसमान में उड़ान भरी है।

5) किन दो वजहों से मायने रखती है ये टाइमिंग?
a) एयरफोर्स चीफ का लेटर: भारत के एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने पिछले दिनों एयरफोर्स के 12 हजार अफसर को लेटर लिखकर किसी भी खतरे के लिए तैयार रहने को कहा था। चीफ ऑफ एयर स्टाफ ने अपने लेटर में कहा था, “शॉर्ट नोटिस पर अपनी पोजिशन से किसी भी ऑपरेशन के लिए तैयार रहें।’
b) पाक की चौकियों पर कार्रवाई: इंडियन आर्मी ने जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान की कई चौकियों को तबाह कर दिया। ये वे चौकियां थीं, जो कवर फायर देकर घुसपैठ में आतंकियों की मदद करती थीं। भारत ने यह कार्रवाई 9 मई को की। इससे पहले, एक मई को पाक आर्मी ने LoC पार कर दी थी। उसने आर्मी-बीएसएफ की पेट्रोल पार्टी पर हमला कर दिया था। इस हमले में शहीद हमारे दो जवानों के सिर काट लिए थे।

6) क्या है सियाचिन?
– सियाचिन दुनिया का सबसे ऊंचा बैटलफील्ड है। यहां ऊंचाई समुद्र तल से 5,400 मीटर से ज्यादा है। यहां सबसे बड़ी लड़ाई बर्फ से होती है। यही वजह है कि 1984 के पहले तक यहां जवानों को तैनात नहीं किया जाता था। लेकिन अचानक पाकिस्तान यहां कब्जे की कोशिश करने लगा।
– 1984 में यहां पहली बार हमारी आर्मी की तैनाती हुई। इन्फॉर्मेशन मिली थी की पाकिस्तान हाई एल्टीट्यूड पर तैनाती में जवानों को दिए जानेवाले खास कपड़े खरीद रहा है। इसके बाद इंडियन आर्मी ने ऑपरेशन मेघदूत चलाकर सियाचीन में अपनी सिक्युरिटी मजबूत कर ली।
– सियाचिन तीन तरफ से पाकिस्तान और चीन से घिरा है। यहां चीन-पाक से सटी 75 KM बॉर्डर की निगरानी करना आर्मी के लिए सबसे मुश्किल काम है। यहां दिन में टेम्प्रेचर माइनस 30 से -55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। खराब मौसम में भी भारतीय सैनिक चौबीसों घंटे बॉर्डर की निगरानी करते हैं।
– सियाचिन में भारतीय फौज की 150 पोस्ट हैं, जिसके लिए 10 हजार सैनिक तैनात किए गए हैं।

7) क्या है विवाद की वजह?
– 1972 के शिमला पैक्ट के वक्त सियाचिन को इंसानों के लायक नहीं समझा गया था। लिहाजा दस्तावेजों में सियाचिन में भारत-पाक के बीच सरहद कहां होगी, इसका जिक्र नहीं किया गया। तब से पाकिस्तान सियाचिन पर अपना हक जताता आ रहा है।

8) हमारे लिए क्यों अहम है?
– सियाचिन के एक तरफ पाक तो दूसरी तरफ चीन है। सबसे अहम ये कि इतनी ऊंचाई से दोनों देशों पर नजर रखना भी आसान है। इसलिए यह स्ट्रैटजिक नजरिए से अहम है। भारत सियाचिन को छोड़ दे तो पाक-चीन की बॉर्डर मिल जाएगी। दोनाें का अलायंस खतरनाक साबित हो सकता है।

सियाचिन पर कब्जा करना चाहता था पाकिस्तान
– पाकिस्तान 17 अप्रैल 1984 को सियाचिन पर कब्जे का ऑपरेशन शुरू करने वाला था। 13 अप्रैल 1984 को इंडियन आर्मी का ऑपरेशन मेघदूत पूरा हुआ।
– इससे पहले तक इस इलाके में पर्वतारोही आते थे। लेकिन फिर यहां सेना के अलावा किसी के भी आने की मनाही हो गई।

एयरलिफ्ट कर पहुंचाया जाता है 6 हजार टन सामन
– 32 सालों में यहां आर्मी के 882 सोल्जर शहीद हो चुके हैं। इनमें से 95 फीसदी की जान जोखिम भरे रास्तों, बर्फ या खराब मौसम ने ली है।
– ग्लेशियर पर हड्डियों को गला देनी वाली ठंड पड़ती है। टेम्परेचर माइनस 55 तक पहुंच जाता है। कई बार सोल्जर्स को ऑक्सीजन मास्क के साथ काम करना होता है।
– हर साल 6000 टन सामान एयरलिफ्ट कर यहां पहुंचाया जाता है। बर्फ से बने टेम्परेरी हेलिपेड पर चॉपर लैंड करता है।
बेहद दुर्गम, बेहद खर्चीला, मौसम सबसे बड़ा दुश्मन
– सर्दियों में सियाचिन में औसतन 1000 सेंटीमीटर बर्फ गिरती है। रात में यहां टेम्परेचर माइनस 55 डिग्री सेल्सियस रहता है।
– ऑक्सीजन का स्तर पर भी यहां कम रहता है। यहां टूथपेस्ट भी जम जाता है। सही ढंग से बोलने में भी काफी मुश्किलें आती हैं।

सियाचिन में एक रोटी 200 रुपए की
– हर रोज आर्मी की तैनाती पर 7 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। यानी हर सेकंड 18 हजार रुपए। इतनी रकम में एक साल में 4000 सेकंडरी स्कूल बनाए जा सकते हैं
– यदि एक रोटी 2 रुपए की है तो यह सियाचिन तक पहुंचते-पहुंचते 200 रुपए की हो जाती है।
पानी का सबसे बड़ा सोर्स
– सियाचिन ग्लेशियर का पानी लद्दाख की नुब्रा नदी का मेन सोर्स है। दुनिया का सबसे ऊंचा सोनम हेलिपैड 21 हजार फीट पर यहीं है। 2009 में हुए एक सर्वे के अनुसार यह ग्लेशियर अब आधा ही रह गया है।

हेलिकॉप्टर से पहुंचाते हैं जरूरी सामान
– सियाचिन पर भारतीय फौज की 150 पोस्ट हैं, जिसके लिए 10 हजार सोल्जर्स तैनात किए गए हैं। यहां ज्यादातर सैनिकों की मौत युद्ध नहीं बल्कि एवलांच से हुई है।
– सोल्जर यहां विशेष तरह के इग्लू कपड़ों में रहते है। सैनिक महीने में सिर्फ एक बार नहाते हैं। सैनिकों को यहां हाइपोक्सिया और हाई एल्टीट्यूड जैसी बीमारियां हो जाती है। वजन घटने लगता है। भूख नहीं लगती, नींद नहीं आने की बीमारी। मेमोरी लॉस का भी खतरा।
– सैनिकाें को यहां रसद पहुंचाने के लिए लगातार हेलिकॉप्टर उड़ान भरते रहते हैं। यहां तैनाती पर ऑफिसर्स को हर माह 21 हजार, सोल्जर्स को हर माह 14 हजार अलांउस मिलता है। सियाचिन में एक सोल्जर की मैक्सिमम 90 दिन की पोस्टिंग ही होती है।

source-DB